महिला आरक्षण पर निर्णायक घड़ी, पीएम मोदी ने सभी दलों से मांगा सहयोग; 16 अप्रैल से संसद में होगी ऐतिहासिक बहस
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए इसे “सच्ची भावना से लागू करने का उपयुक्त समय” बताया है। संसद के विशेष सत्र से पहले लोकसभा और राज्यसभा के फ्लोर लीडर्स को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 16 अप्रैल से संसद में महिला आरक्षण कानून जैसे ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाले विषय पर विस्तृत चर्चा शुरू होगी। उन्होंने इसे हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए उम्मीद जताई कि यह बहस देश की राजनीतिक दिशा को नया आयाम देगी।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं को निर्णय लेने और नेतृत्व की मुख्यधारा में पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी रहेगी। प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण को “विकसित हिंदुस्तान” के लक्ष्य से सीधे जोड़ते हुए कहा कि यह केवल सामाजिक न्याय का प्रश्न नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति की अनिवार्य शर्त है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 2029 के लोकसभा और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करना सरकार की प्राथमिकता है। उनका मानना है कि इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी न केवल बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्माण में भी संतुलन और संवेदनशीलता आएगी।
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने में सहयोग करें, ताकि महिला आरक्षण कानून को धरातल पर उतारा जा सके। उन्होंने कहा कि यह अवसर ऐतिहासिक है और इसे राजनीतिक मतभेदों के कारण गंवाना नहीं चाहिए।
वहीं, इस महत्वपूर्ण सत्र को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों के लिए 16 से 18 अप्रैल 2026 तक लोकसभा और राज्यसभा में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। पार्टी ने सभी केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इन तारीखों के दौरान सदन में मौजूद रहें और किसी भी प्रकार की अनुपस्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े विधायी प्रावधानों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसे पारित कराने के लिए व्यापक रणनीति पर काम किया जा रहा है। ऐसे में आगामी संसद सत्र को न केवल राजनीतिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक परिवर्तन के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Reviewed by PSA Live News
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4:43:00 pm
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