रांची। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए हटिया रेलवे स्टेशन पर मानव तस्करी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। ‘ऑपरेशन आहट’ के तहत चलाए गए विशेष अभियान में तीन नाबालिग बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया, जबकि एक आरोपी तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया।
रांची मंडल के मंडल सुरक्षा आयुक्त श्री पवन कुमार के निर्देशन में आरपीएफ लगातार सतर्कता बरत रही है। इसी क्रम में 25 अप्रैल को हटिया स्टेशन पर मानव तस्करी एवं बाल श्रम के खिलाफ एक विशेष संयुक्त अभियान चलाया गया। यह कार्रवाई पोस्ट कमांडर हटिया और महिला सेल, रांची के निरीक्षक के पर्यवेक्षण में केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से अपराह्न 4:45 बजे शुरू हुई।
मुख्य द्वार पर संदिग्धों की पहचान, समय रहते कार्रवाई
करीब 5:00 बजे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर जांच के दौरान आरपीएफ टीम को तीन नाबालिग लड़कों के साथ एक संदिग्ध युवक नजर आया। पूछताछ में बच्चों की पहचान रबी प्रसाद (15 वर्ष), सत्यबान कुमार (15 वर्ष) और लक्ष्मीकांत कुमार (14 वर्ष) के रूप में हुई, जो पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के निवासी हैं। उनके साथ मौजूद 27 वर्षीय नयन कुमार, ओल्ड पुरुलिया का निवासी, संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त पाया गया।
नौकरी का झांसा देकर बेंगलुरु ले जाने की थी तैयारी
पूछताछ में बच्चों ने बताया कि आरोपी उन्हें नौकरी दिलाने के बहाने बेंगलुरु ले जा रहा था। वे हटिया से ट्रेन संख्या 18367 के जरिए SMVT बेंगलुरु जाने वाले थे। बच्चों ने यह भी खुलासा किया कि वे आरोपी को पहले से नहीं जानते थे और उनके गांव से पहले भी कई बच्चों को इसी तरह काम के बहाने बाहर भेजा गया है।
हर बच्चे पर कमीशन, नेटवर्क का खुलासा
गहन पूछताछ में आरोपी नयन कुमार ने स्वीकार किया कि वह बेंगलुरु के निर्माण स्थलों पर मजदूर सप्लाई करता है और प्रति मजदूर ₹300-₹400 तक कमीशन पाता है। वह गरीब परिवारों को पैसे का लालच देकर बच्चों को अपने साथ ले जाता था।
उसके पास से दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड की प्रतियां और रेलवे टिकट बरामद किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि वह हरिहर कुमार नामक व्यक्ति के निर्देश पर काम करता था, जो गांवों में बच्चों और उनके परिवारों को पैसे देकर उन्हें बाहर भेजने के लिए तैयार करता है।
विशेष रूप से, 25 अप्रैल को ही आरोपी को ₹25,000 की रकम डिजिटल माध्यम (फोनपे) से प्राप्त हुई थी, जिससे इस गिरोह की सक्रियता और संगठित रूप का संकेत मिलता है।
बच्चों को सुरक्षित आश्रय, आरोपी AHTU को सौंपा गया
आरपीएफ की तत्परता से तीनों नाबालिगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर बाल संरक्षण के तहत बालाश्रय, रांची भेज दिया गया है। वहीं गिरफ्तार आरोपी को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), कोतवाली रांची को सौंप दिया गया है, जहां आगे की जांच जारी है।
टीम की सराहनीय भूमिका
इस सफल अभियान में IPF/R कुजूर, महिला सेल रांची, SI दीपक कुमार, उज्ज्वल कुमार, सुनीता तिर्की सहित आरपीएफ के कई अधिकारियों और जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी मानव तस्करी की वारदात को समय रहते विफल कर दिया।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि किस तरह मानव तस्करी के गिरोह गरीब और भोले-भाले परिवारों को निशाना बनाकर बच्चों का भविष्य अंधकारमय बना रहे हैं। आरपीएफ की यह कार्रवाई न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि ऐसे लालच और झांसे से सतर्क रहें।
Reviewed by PSA Live News
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5:54:00 pm
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