महिला नेतृत्व वाला लोकतंत्र ही ‘विकसित भारत-2047’ की मजबूत नींव बनेगा
हांसी (हरियाणा) | संवाददाता: राजेश सलूजा। भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका को नई ऊंचाई देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023’ को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए भाजपा की वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता एवं कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की राष्ट्रीय सलाहकार एडवोकेट नेहा धवन ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को “नीति की लाभार्थी” से “नीति की निर्माता” बनने की दिशा में सशक्त करेगा।
सोमवार को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, हांसी में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में पारित यह कानून केवल एक संवैधानिक संशोधन नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब महिला सशक्तिकरण केवल समानता या प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना समय की मांग है।
आर्थिक और सामाजिक बदलाव की झलक
नेहा धवन ने वैश्विक शोध का हवाला देते हुए कहा कि यदि लैंगिक असमानता को प्रभावी रूप से कम किया जाए तो विश्व अर्थव्यवस्था में लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर तक की वृद्धि संभव है। उन्होंने पिछले एक दशक में महिलाओं के जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों को आंकड़ों के माध्यम से रेखांकित किया—
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 32.29 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, जिससे वित्तीय समावेशन को गति मिली।
मुद्रा योजना के अंतर्गत लगभग 68-69% ऋण महिला उद्यमियों को मिले।
स्टैंड-अप इंडिया योजना के 84% लाभार्थी महिलाएं हैं, जो उनकी आर्थिक भागीदारी को सशक्त करता है।
ग्रामीण भारत में महिला सशक्तिकरण
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति में सुधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 72% घरों का स्वामित्व महिलाओं को मिलने से उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिला है। वहीं ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के चलते माध्यमिक शिक्षा में बालिकाओं का नामांकन बढ़कर 80.2% तक पहुंच गया है।
राजनीति में बढ़ती भागीदारी
नेहा धवन ने बताया कि आज देश में लगभग 14.5 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं, जो पंचायती राज संस्थाओं में 46% भागीदारी का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर महिलाओं ने पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता दिखाई है, जो अब संसद और विधानसभाओं में भी दिखाई देगी।
उन्होंने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य देते हुए बताया कि वर्ष 1952 में लोकसभा में मात्र 22 महिलाएं थीं, जो 2024 में बढ़कर 75 हो गई हैं, जबकि राज्यसभा में महिलाओं की भागीदारी 17% तक पहुंच चुकी है। हालांकि, नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत प्रस्तावित 33% आरक्षण इस भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार
महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार के लिए चल रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा—
उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए गए, जिससे महिलाओं को धुएं से राहत मिली।
जल जीवन मिशन के माध्यम से 14.45 करोड़ घरों तक नल का जल पहुंचा, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में कमी आई।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत 4.27 करोड़ महिलाओं को पोषण सहायता मिली, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।
‘महिला विकास’ से ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ की ओर
प्रेस वार्ता के अंत में नेहा धवन ने कहा कि भाजपा सरकार का दृष्टिकोण अब “महिला विकास” से आगे बढ़कर “महिला नेतृत्व वाले विकास” की दिशा में है। ‘लखपति दीदी’ और ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाएं महिलाओं को तकनीक और उद्यमिता से जोड़ रही हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम हिंदुस्तान को ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा और देश के लोकतंत्र को अधिक समावेशी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाएगा।
इस अवसर पर ब्लॉक समिति चेयरपर्सन शीला यादव, भाजपा जिला सचिव युवा मोर्चा ज्योति, जिला कार्यकारिणी सदस्य अंजलि, महिला मोर्चा अध्यक्ष नीलम देवी, जिला महिला मोर्चा महामंत्री निशा, अंग्रेजो, सुमन, सयामी देवी तथा मनजीत कुमारी सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
Reviewed by PSA Live News
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5:43:00 pm
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