हजारीबाग में पत्रकारों पर हमला: सवाल पूछने पर बवाल, मंत्री के समर्थकों पर मारपीट का आरोप, राज्यभर में रोष
रांची | विशेष रिपोर्ट । झारखंड के हजारीबाग में पत्रकारों के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट की घटना ने राज्य की राजनीति और मीडिया जगत में भारी हलचल मचा दी है। मामला तब गरमा गया जब स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी से एक पत्रकार ने विमान हादसे के मृतक को अब तक मुआवज़ा नहीं मिलने को लेकर सवाल पूछा। सवाल पूछना मंत्री समर्थकों को नागवार गुजरा और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
सवाल से शुरू हुआ विवाद, मारपीट तक पहुंचा मामला
बताया जा रहा है कि News18 के पत्रकार सुशांत सोनी ने मंत्री से सीधे तौर पर मुआवज़े को लेकर सवाल किया। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ समर्थकों ने पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पत्रकार के साथ मारपीट तक की नौबत आ गई।
घटना के दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे “रफ्तार न्यूज” के पत्रकार आशीष साव को भी नहीं बख्शा गया। आरोप है कि मंत्री और पुलिस की मौजूदगी में ही समर्थकों ने उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इस घटना में कई पत्रकारों को चोटें आईं, जिनमें से एक घायल पत्रकार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
प्रेस क्लब ने दर्ज कराई FIR, कार्रवाई की मांग तेज
इस गंभीर घटना के बाद हज़ारीबाग प्रेस क्लब ने संबंधित थाने में FIR दर्ज कराते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रेस क्लब ने साफ कहा है कि पत्रकारों की सुरक्षा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं रांची प्रेस क्लब ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यभर के पत्रकारों से मंत्री के सभी कार्यक्रमों के बहिष्कार का आह्वान किया है। इस अपील के बाद पूरे झारखंड में मीडिया कर्मियों के बीच आक्रोश साफ देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी निंदा, सुरक्षा कानून की मांग
इस घटना की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कड़ी निंदा की है। संगठन ने झारखंड सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की है, ताकि रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय सलाहकार समिति के सदस्य अशोक कुमार झा और पूर्व प्रदेश संयोजक अंशिका ओझा ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि राज्य में पत्रकारों को सुरक्षित माहौल मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तभी मजबूत रह सकता है, जब पत्रकार बिना किसी भय और दबाव के अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।
लोकतंत्र पर सवाल, सरकार की चुप्पी पर उठे प्रश्न
इस घटना के बाद राज्य सरकार की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
हजारीबाग की यह घटना न केवल पत्रकारों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सवाल पूछना कितना जोखिम भरा होता जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
Reviewed by PSA Live News
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2:11:00 pm
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