बिहार में निजी स्कूलों पर सरकार का बड़ा शिकंजा: 15,668 स्कूलों की होगी सघन जांच, नियम तोड़ने वालों की मान्यता होगी रद्द
पटना। बिहार सरकार ने राज्य में संचालित निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली, शुल्क संरचना और शैक्षणिक मानकों की व्यापक समीक्षा का फैसला लेते हुए 15,668 मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की सघन जांच कराने का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षा विभाग के इस कड़े कदम से निजी विद्यालय प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) और बिहार राज्य बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली-2011 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी विद्यालय को बख्शा नहीं जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे विद्यालयों की मान्यता भी तत्काल प्रभाव से रद्द की जा सकती है।
राज्य के शिक्षा विभाग द्वारा शुरू किया गया यह अभियान बिहार में निजी शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करने वाला अब तक का सबसे बड़ा निरीक्षण अभियान माना जा रहा है। लंबे समय से अभिभावकों की ओर से निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी फीस वसूली, आधारभूत सुविधाओं की कमी, शिक्षकों के शोषण तथा नियमों की अनदेखी की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने अब व्यापक जांच का निर्णय लिया है।
फीस से लेकर सुविधाओं तक होगी पूरी पड़ताल
जांच के दौरान विद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों से वसूली जा रही फीस और बदले में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विद्यालय अभिभावकों से अनावश्यक और मनमाने शुल्क की वसूली तो नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा परिवहन शुल्क, वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क तथा अन्य मदों में लिए जाने वाले शुल्क की भी समीक्षा की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई जिलों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ निजी विद्यालय शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय बनाकर संचालित कर रहे हैं। ऐसे मामलों की सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी।
स्कूल भवन, खेल मैदान और सुरक्षा व्यवस्था की भी होगी जांच
निरीक्षण दल विद्यालयों की आधारभूत संरचना का भी गहन निरीक्षण करेगा। इसमें यह देखा जाएगा कि विद्यालय भवन निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं। पर्याप्त कक्षाएं, शौचालय, पेयजल व्यवस्था, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान और बच्चों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
कई निजी विद्यालय किराये के भवनों या सीमित संसाधनों के साथ संचालित हो रहे हैं। ऐसे विद्यालयों को यह साबित करना होगा कि वे शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन कर रहे हैं।
शिक्षकों के वेतन और नियुक्ति प्रक्रिया पर भी रहेगी नजर
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की स्थिति होगी। अधिकारियों द्वारा यह देखा जाएगा कि विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक उपलब्ध हैं या नहीं। साथ ही उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार वेतन दिया जा रहा है अथवा नहीं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कई निजी विद्यालय अभिभावकों से भारी फीस वसूलते हैं, लेकिन शिक्षकों को अपेक्षाकृत बहुत कम वेतन देते हैं। सरकार इस पहलू पर विशेष ध्यान देने जा रही है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों के अधिकार दोनों सुरक्षित रह सकें।
तीन वर्ष बाद नवीनीकरण की प्रक्रिया भी होगी जांच के दायरे में
बिहार में निजी विद्यालयों को तीन वर्षों के लिए सशर्त मान्यता प्रदान की जाती है। इसके बाद विद्यालयों को मान्यता का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है। जांच टीम यह भी सत्यापित करेगी कि विद्यालयों ने समय पर अपने प्रस्वीकृति प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराया है या नहीं।
जिन विद्यालयों की मान्यता अवधि समाप्त हो चुकी है और जिन्होंने नवीनीकरण नहीं कराया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
जिला स्तर पर बनेगी उच्चस्तरीय संयुक्त जांच टीम
शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को ई-मेल के माध्यम से निर्देश जारी कर जांच अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने को कहा है। प्रत्येक जिले में एक उच्चस्तरीय संयुक्त जांच टीम गठित की जाएगी।
इस टीम में जिलाधिकारी (डीएम), उप विकास आयुक्त (डीडीसी), अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इन अधिकारियों को विद्यालयों की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
बिहार में 30 हजार से अधिक निजी विद्यालय संचालित
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में वर्तमान समय में लगभग 30 हजार निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से 15,668 विद्यालयों को सरकार से मान्यता प्राप्त है, जबकि 1,012 विद्यालय अभी मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं।
सरकार का मानना है कि निजी शिक्षा क्षेत्र का विस्तार तो हुआ है, लेकिन इसके साथ गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह व्यापक जांच अभियान शुरू किया गया है।
नियमों का उल्लंघन मिला तो होगी कठोर कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जांच केवल औपचारिकता नहीं होगी। यदि किसी विद्यालय में नियमों का उल्लंघन, गलत जानकारी, आधारभूत सुविधाओं की कमी, शिक्षकों के शोषण या आरटीई कानून की अनदेखी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार चेतावनी, जुर्माना, निलंबन और मान्यता रद्द करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। इससे निजी विद्यालयों को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
अभिभावकों को मिल सकती है बड़ी राहत
सरकार की इस पहल को लाखों अभिभावकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। वर्षों से निजी विद्यालयों की मनमानी फीस, अनावश्यक शुल्क और विभिन्न प्रकार की आर्थिक मांगों को लेकर अभिभावक परेशान रहे हैं। अब व्यापक जांच के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने और निजी विद्यालयों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अभियान प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो बिहार में निजी शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि अभिभावकों का आर्थिक बोझ भी कम हो सकता है।
सरकार का संदेश साफ—शिक्षा नहीं, मनमानी पर होगी कार्रवाई
बिहार सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले विद्यालयों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर शिक्षा के नाम पर कारोबार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। राज्यभर में शुरू होने जा रही इस जांच पर अब लाखों अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा जगत की निगाहें टिकी हुई हैं। यह अभियान बिहार की निजी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता का नया अध्याय साबित हो सकता है।
Reviewed by PSA Live News
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8:24:00 am
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