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बिहार पुलिस में प्रमोशन का पेच: 17 साल की सेवा के बाद भी सीनियर दारोगा इंतजार में, जूनियर बने इंस्पेक्टर


पटना।
बिहार पुलिस महकमे में इन दिनों प्रमोशन व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला चर्चा में है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली, वरिष्ठता व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति यह है कि लगभग 17 वर्षों से सेवा दे रहे 2009 बैच के 422 वरिष्ठ दारोगा आज भी पदोन्नति की प्रतीक्षा में हैं, जबकि उनसे वर्षों बाद नियुक्त हुए 2017 बैच के लगभग 200 जूनियर अधिकारियों को इंस्पेक्टर का उच्चतर प्रभार देकर आगे बढ़ा दिया गया है।

इस असामान्य स्थिति ने पुलिस महकमे के भीतर असंतोष पैदा कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारी इसे न केवल अपने अधिकारों की अनदेखी मान रहे हैं, बल्कि यह भी कह रहे हैं कि इससे विभाग में अनुभव और वरिष्ठता का महत्व कम होता दिखाई दे रहा है।

17 वर्षों की सेवा के बाद भी नहीं मिली तरक्की

2009 बैच के ये दारोगा पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय से राज्य के विभिन्न जिलों में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग से जुड़े दायित्व निभाते आ रहे हैं। इनमें कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में सेवा दी, संवेदनशील इलाकों में तैनाती झेली और लंबे समय तक विभागीय जिम्मेदारियां निभाईं।

लेकिन इनकी सेवा अवधि और अनुभव के बावजूद आज भी वे उसी पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनके जूनियर अधिकारी उच्च पद का प्रभार संभाल रहे हैं। इससे वरिष्ठ अधिकारियों के बीच निराशा और असंतोष का माहौल बना हुआ है।

आखिर कैसे जूनियर निकल गए आगे?

जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ प्रशिक्षण के बाद होने वाली परीक्षा और उसके अंकों के आधार पर तैयार की गई वरीयता सूची में बताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि 2009 बैच की नियुक्तियां अलग-अलग चरणों में हुई थीं। सभी अधिकारियों ने एक साथ ज्वाइन नहीं किया। इसके बाद प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अंकों को आधार बनाकर वरीयता सूची तैयार की गई। इसी प्रक्रिया में वरिष्ठता के पारंपरिक मानकों में बदलाव हो गया और कई अधिकारी, जो सेवा में पहले आए थे, सूची में नीचे चले गए।

यही कारण बना कि बाद में नियुक्त कुछ अधिकारियों को अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति मिल गई और पदोन्नति प्रक्रिया में वे आगे निकल गए।

पुलिस मुख्यालय की सूची ने बढ़ाया विवाद

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2023 में जारी पुलिस मुख्यालय की वरीयता सूची में इन 422 अधिकारियों की स्थिति मजबूत मानी गई थी। इसके बावजूद अब तक इनके प्रमोशन पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।

इससे सवाल उठ रहे हैं कि यदि वरीयता सूची में स्थिति स्पष्ट है तो पदोन्नति प्रक्रिया अब तक लंबित क्यों है।

1168 पद रिक्त, फिर भी नहीं बढ़ी प्रक्रिया

मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि विभाग में दारोगा से इंस्पेक्टर स्तर तक लगभग 1168 पद रिक्त बताए जा रहे हैं। सामान्य परिस्थितियों में इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियां पदोन्नति का रास्ता आसान बनाती हैं, लेकिन यहां स्थिति उलट दिखाई दे रही है।

जानकारी के मुताबिक विभागीय जांच, न्यायालय में लंबित मामलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर प्रमोशन प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा।

वरिष्ठ अधिकारियों का आरोप है कि रिक्तियां होने के बावजूद निर्णय प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी खिंच रही है।

अदालत की शरण में पहुंचे अधिकारी

लंबे समय तक इंतजार और लगातार अनदेखी से परेशान होकर अब वरिष्ठ दारोगाओं ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। बताया जा रहा है कि प्रभावित अधिकारियों ने इस संबंध में डीजीपी और एडीजी को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।

अधिकारियों ने अपने पत्र में कहा है कि वर्षों की सेवा और अनुभव के बावजूद उन्हें उनका वैध अधिकार नहीं मिल पा रहा है।

पुलिस विभाग के अंदर यह मामला अब केवल प्रमोशन का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह सम्मान, वरिष्ठता और कार्य संतुष्टि से भी जुड़ गया है।

नई सरकार से बढ़ी उम्मीदें

राज्य में नई सरकार बनने के बाद इन अधिकारियों के बीच उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है। पुलिस महकमे में चर्चा है कि जल्द ही करीब 200 इंस्पेक्टरों को डीएसपी पद पर पदोन्नति दी जा सकती है।

यदि ऐसा होता है तो इंस्पेक्टर स्तर पर बड़ी संख्या में पद रिक्त होंगे और वर्षों से इंतजार कर रहे वरिष्ठ दारोगाओं को पदोन्नति का अवसर मिल सकता है।

प्रशासनिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि नई सरकार इस लंबे समय से लंबित मामले का समाधान निकालने की दिशा में पहल कर सकती है।

बड़ा सवाल: अनुभव महत्वपूर्ण या प्रक्रिया?

यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक प्रश्न को जन्म दे रहा है—क्या विभागीय प्रक्रियाएं और तकनीकी नियम अनुभव तथा वरिष्ठता से ऊपर हो सकते हैं?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वर्षों तक सेवा देने वाले अधिकारी प्रमोशन से वंचित रहते हैं और जूनियर अधिकारी आगे निकल जाते हैं, तो इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि पूरे विभाग की कार्य संस्कृति पर भी असर पड़ सकता है।

अब सबकी निगाहें सरकार और पुलिस मुख्यालय पर टिकी हैं कि वर्षों से उलझे इस "प्रमोशन पेच" का समाधान कब निकलता है और क्या वरिष्ठ अधिकारियों को उनका बहुप्रतीक्षित अधिकार मिल पाता है।

बिहार पुलिस में प्रमोशन का पेच: 17 साल की सेवा के बाद भी सीनियर दारोगा इंतजार में, जूनियर बने इंस्पेक्टर बिहार पुलिस में प्रमोशन का पेच: 17 साल की सेवा के बाद भी सीनियर दारोगा इंतजार में, जूनियर बने इंस्पेक्टर Reviewed by PSA Live News on 1:08:00 pm Rating: 5

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