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झारखंड में सांसद निधि खर्च की रफ्तार सुस्त, विश्वविद्यालयों में आउटसोर्सिंग पर माकपा का तीखा विरोध

रांची, 03 मई 2026: 

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने झारखंड में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अहम मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पार्टी ने जहां सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) के बेहद कम उपयोग को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, वहीं विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों को समाप्त कर आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू करने के फैसले को प्रतिगामी कदम करार दिया है।

माकपा के राज्य सचिवमंडल द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि झारखंड में सांसद निधि का अब तक केवल 10 प्रतिशत उपयोग होना प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। संवाद माध्यमों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के 14 सांसदों को कुल 140.87 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी, लेकिन अब तक महज 14 करोड़ रुपये की योजनाएं ही धरातल पर उतर सकी हैं।

पार्टी ने आरोप लगाया कि योजनाओं को स्वीकृति मिलने के बावजूद उनका समय पर क्रियान्वयन नहीं होना यह दर्शाता है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल कागजी औपचारिकताओं में उलझे हुए हैं। माकपा ने कहा कि इस तरह की लापरवाही राज्य के विकास में बड़ी बाधा बन रही है। पार्टी ने मांग की है कि योजनाओं के लंबित रहने और अधूरे कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय की जाए तथा मॉनिटरिंग प्रणाली को मजबूत किया जाए।

वहीं, दूसरे मुद्दे पर माकपा ने रांची विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी के नियमित पदों को समाप्त कर आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मियों की नियुक्ति के निर्णय का कड़ा विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि यह फैसला न केवल कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है, बल्कि इससे उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।

माकपा ने अपने वक्तव्य में उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय में पहले से ही सैकड़ों कर्मचारी आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत हैं। ऐसे में इस नई व्यवस्था से अस्थायी कर्मचारियों की संख्या और बढ़ेगी, जिससे असुरक्षा और शोषण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से पार्टी ने बताया कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय मुख्यालय, 14 अंगीभूत कॉलेजों और 10 डिग्री कॉलेजों में पुनर्गठन के नाम पर कुल 1851 गैर-शैक्षणिक पदों को समाप्त कर दिया है।

पार्टी ने राज्य सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों में स्थायी रोजगार की व्यवस्था को समाप्त करना दूरगामी रूप से शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करेगा। माकपा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया, तो पार्टी व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होगी।

माकपा के इस बयान के बाद राज्य में विकास योजनाओं की धीमी रफ्तार और शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों को लेकर एक नई बहस छिड़ने के आसार हैं।

झारखंड में सांसद निधि खर्च की रफ्तार सुस्त, विश्वविद्यालयों में आउटसोर्सिंग पर माकपा का तीखा विरोध झारखंड में सांसद निधि खर्च की रफ्तार सुस्त, विश्वविद्यालयों में आउटसोर्सिंग पर माकपा का तीखा विरोध Reviewed by PSA Live News on 8:41:00 pm Rating: 5

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