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आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला: सड़क दुर्घटना मृतकों के परिजनों को अब 4 लाख अनुग्रह राशि

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की समीक्षा बैठक, कई अहम निर्णयों पर लगी मुहर


रांची: 
झारखंड में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, संवेदनशील और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में आयोजित झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की समीक्षा बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर सहमति बनी।

बैठक में राज्य में आपदाओं से निपटने की तैयारी, राहत वितरण प्रणाली, और भविष्य की रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आपदा प्रबंधन तंत्र को अधिक त्वरित, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके।

सड़क दुर्घटना में मृतकों के लिए अनुग्रह राशि में चार गुना वृद्धि

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में वृद्धि को लेकर लिया गया। अब सड़क दुर्घटना में मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी, जबकि पहले यह राशि मात्र 1 लाख रुपये थी। इस फैसले को राज्य सरकार का मानवीय और संवेदनशील कदम माना जा रहा है।

अनुग्रह अनुदान प्रक्रिया होगी सरल और पारदर्शी

राज्य में विभिन्न प्रकार की स्थानीय आपदाओं में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को अनुग्रह राशि प्रदान करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाने का निर्णय लिया गया। अब मृतक के आश्रितों को उनके गृह जिले के उपायुक्त द्वारा घटना का सत्यापन कर अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।

दोहरे भुगतान पर लगेगा अंकुश

अनुग्रह राशि के दोहरे भुगतान को रोकने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया है। साथ ही यह भी तय किया गया कि यदि कोई व्यक्ति राज्य या केंद्र सरकार की बीमा योजना से आच्छादित है, तो वह या तो बीमा राशि प्राप्त करेगा या आपदा प्रबंधन के अंतर्गत मिलने वाली अनुग्रह राशि—दोनों का लाभ एक साथ नहीं मिलेगा।

आपदा प्रबंधन कर्मियों की सेवा अवधि में विस्तार

अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम (ODMP) के तहत जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार में कार्यरत क्षमता संवर्धन पदाधिकारी और जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी की सेवा अवधि को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान की गई।

‘युवा आपदा मित्र’ योजना को मिलेगा नया स्वरूप

दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में संचालित ‘युवा आपदा मित्र’ योजना को और मजबूत बनाने के लिए स्वयंसेवकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार कर उसे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) से जोड़ने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने और स्वयंसेवकों को कार्य के दौरान भत्ता देने के प्रस्ताव पर भी काम करने का निर्देश दिया।

डूबने से होने वाली मौतों पर रोक के लिए विशेष पहल

राज्य में डूबने से होने वाली घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए 48 गोताखोरों को चिन्हित कर प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री ने गोताखोरों की संख्या बढ़ाने, पुलिस जवानों और गृहरक्षकों को इसमें शामिल करने तथा महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी

बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह, सचिव श्री प्रशांत कुमार, सचिव श्रीमती विप्रा भाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य सरकार के इन निर्णयों से स्पष्ट है कि झारखंड में आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को त्वरित और पर्याप्त राहत देने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

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