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चार श्रम कोडों के खिलाफ झारखंड में मजदूरों का उबाल, ‘आक्रोश दिवस’ पर ट्रेड यूनियनों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी


रांची :
केंद्र सरकार द्वारा चार श्रम कोडों के नियमों की अधिसूचना जारी किए जाने के विरोध में मंगलवार को झारखंडभर में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर राज्यव्यापी ‘मजदूर आक्रोश दिवस’ मनाया गया। इस दौरान खदानों, औद्योगिक क्षेत्रों, फैक्ट्रियों, सार्वजनिक स्थलों और विभिन्न कार्यस्थलों पर मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए श्रम कोडों की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।

राजधानी रांची में शाम को आयोजित मुख्य विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूरों, कर्मचारियों, ठेका श्रमिकों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों, महिला संगठनों और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर श्रमिक विरोधी नीतियां लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 8 मई 2026 को चारों श्रम कोडों के नियमों की अधिसूचना जारी करना देश के श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला है।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि हालिया विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद श्रम कोड लागू करने की प्रक्रिया तेज करना यह साबित करता है कि सरकार कॉरपोरेट घरानों के हित में काम कर रही है और श्रमिकों के संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए श्रम कोड न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, तय कार्य घंटे, स्थायी रोजगार और यूनियन बनाने जैसे बुनियादी अधिकारों को कमजोर कर देंगे।

संयुक्त मंच के नेताओं ने कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव के जरिए बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जबकि मजदूरों की नौकरी, वेतन और सुरक्षा को खतरे में डाला जा रहा है। वक्ताओं ने दावा किया कि इन श्रम कोडों के लागू होने से ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और स्थायी रोजगार की व्यवस्था कमजोर होगी।

प्रदर्शनकारियों ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 तथा यूएपीए जैसे कानूनों का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार श्रमिक आंदोलनों और लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए दमनकारी कानूनों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि गेट मीटिंग, पर्चा वितरण और ज्ञापन सौंपने जैसी सामान्य लोकतांत्रिक गतिविधियों को भी रोकने का प्रयास किया जा रहा है।

ट्रेड यूनियनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि श्रमिक आंदोलन किसी भी कीमत पर “शोषणकारी और मजदूर विरोधी श्रम कोडों” को स्वीकार नहीं करेगा। संयुक्त मंच ने कहा कि आने वाले दिनों में देशभर में व्यापक जनसंघर्ष और निर्णायक आंदोलन चलाया जाएगा। नेताओं ने इसे केवल श्रम अधिकारों की लड़ाई नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई बताया।

संयुक्त मंच ने असंगठित मजदूरों, ठेका श्रमिकों, खेतिहर मजदूरों, किसानों और मनरेगा श्रमिकों के संघर्षों के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए 15 मई को प्रस्तावित मनरेगा श्रमिकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा भी की। ट्रेड यूनियनों ने कहा कि यदि सरकार ने श्रम कोडों को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

चार श्रम कोडों के खिलाफ झारखंड में मजदूरों का उबाल, ‘आक्रोश दिवस’ पर ट्रेड यूनियनों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी चार श्रम कोडों के खिलाफ झारखंड में मजदूरों का उबाल, ‘आक्रोश दिवस’ पर ट्रेड यूनियनों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी Reviewed by PSA Live News on 6:35:00 pm Rating: 5

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