अपरा एकादशी पर उमड़ा आस्था का सागर, श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में दिनभर गूंजते रहे वैदिक मंत्र और जयघोष
रांची। राजधानी रांची स्थित प्रसिद्ध दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की पावन अपरा (अचला) एकादशी के अवसर पर बुधवार, 13 मई को भव्य व्रतोत्सव एवं विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, वैदिक परंपरा और आगमोक्त विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। बुधे-भद्रा सिद्धियोग में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने भाग लेकर भगवान श्रीवेंकटेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। पूरा वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि, घंटानाद और “गोविंदा-गोविंदा” के जयघोष से भक्तिमय बना रहा। मंदिर को आकर्षक पुष्प सज्जा, सुगंधित धूप एवं दीपों से अलंकृत किया गया था, जिससे संपूर्ण परिसर दिव्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित दिखाई दे रहा था।
व्रतोत्सव के अंतर्गत भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का षोडशोपचार पूजन वेद मंत्रों एवं आगम शास्त्र की परंपरानुसार संपन्न किया गया। पूजन में शुभ एवं सुवासित सामग्रियों को विधिवत अर्पित करते हुए भगवान का आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, मधुपर्क, वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप तथा अन्य उपचारों के माध्यम से तिरूवाराधन संपादित हुआ।
इसके पश्चात भगवान श्रीपद्मावती वल्लभ श्रीवेंकटेश्वर के दिव्य एवं मनोहर स्वरूप की भव्य नीराजन महाआरती की गई। आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भगवान के दर्शन किए। मंदिर परिसर में आध्यात्मिक उल्लास और भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली।
विशेष नैवेद्य अर्पण के अंतर्गत भगवान को विविध प्रकार के स्वादिष्ट फलाहारी व्यंजन, षड्रस युक्त प्रसाद एवं वेदोक्त विधि से तैयार अमृतमय भोग समर्पित किए गए। इसके उपरांत श्रुति, उपनिषद, देशिक स्तोत्र तथा विभिन्न वैष्णव स्तोत्र मालाओं के माध्यम से भगवान की स्तुति एवं वंदना की गई।
दिनभर सहस्त्रनाम अर्चना, लक्ष्मी स्तोत्र अर्चना एवं वेंकटेश स्तोत्र सतनाम अर्चना के मधुर मंत्रोच्चार से मंदिर परिसर भक्तिरस में डूबा रहा। श्रद्धालु भक्त मंत्रों की ध्वनि एवं धार्मिक अनुष्ठानों के दर्शन कर भावविभोर होते रहे।
मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास ने समस्त धार्मिक अनुष्ठानों को वैदिक परंपरा एवं विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराया।
अपरा एकादशी के इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं ने व्रत, पूजन एवं दर्शन कर सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की कामना की। मंदिर प्रबंधन के अनुसार दिनभर हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीवेंकटेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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3:53:00 pm
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