एक्सपायर हो चुके अग्निशमन सिलेंडर, मरीजों और परिजनों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
रांची : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) से जुड़ा विश्राम सदन इन दिनों भारी अव्यवस्था, लापरवाही और सुरक्षा खामियों का केंद्र बनता जा रहा है। यहां इलाज कराने आए मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिए बनाए गए विश्राम सदन में बुनियादी सुविधाओं की कमी तो पहले से थी, लेकिन अब फायर सेफ्टी सिस्टम की गंभीर लापरवाही ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार विश्राम सदन में लगाए गए कई अग्निशमन सिलेंडरों की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। कई सिलेंडरों पर अंकित रिफिलिंग और निरीक्षण की तिथि महीनों पहले समाप्त हो गई, बावजूद इसके उन्हें न तो बदला गया और न ही दोबारा रिफिल कराया गया। ऐसे में यदि भवन में आग लगने जैसी कोई दुर्घटना होती है तो वहां ठहरे सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित
विश्राम सदन में रहने वाले लोगों का कहना है कि भवन में सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कई जगहों पर लगे अग्निशमन यंत्र धूल फांक रहे हैं, जबकि कुछ सिलेंडरों के पाइप तक खराब पाए गए। भवन के कई हिस्सों में आपातकालीन निकासी मार्ग (Emergency Exit) का स्पष्ट संकेत भी नहीं है।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराने का दावा तो किया जाता है, लेकिन जमीनी स्थिति पूरी तरह अलग है। लोगों का कहना है कि जिस भवन में रोजाना सैकड़ों लोग रहते हों, वहां इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता देने के समान है।
दूर-दराज से आने वाले मरीजों के परिजन रहते हैं विश्राम सदन में
रिम्स विश्राम सदन में झारखंड सहित बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों से आए मरीजों के परिजन ठहरते हैं। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थान राहत का केंद्र माना जाता है, लेकिन यहां की अव्यवस्था अब लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।
कई लोगों ने बताया कि भवन में साफ-सफाई की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। शौचालयों की हालत खराब है और कई कमरों में बिजली तथा पंखों की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा रात के समय सुरक्षा कर्मियों की संख्या भी बेहद कम बताई जा रही है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
रिम्स परिसर में अव्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। अस्पताल परिसर में बढ़ती भीड़, जर्जर भवनों और संसाधनों की कमी को लेकर सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने समय-समय पर चिंता जताई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में फायर सेफ्टी को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। देश के विभिन्न अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं में कई मरीजों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा अस्पतालों में नियमित फायर ऑडिट और सुरक्षा जांच के निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद रिम्स विश्राम सदन की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने रिम्स प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि एक्सपायर अग्निशमन सिलेंडरों को तुरंत बदला जाए, पूरे भवन का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन केवल बड़ी घटनाओं के बाद ही सक्रिय होता है, जबकि पहले से व्यवस्था दुरुस्त करने की दिशा में गंभीर पहल नहीं की जाती। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी खड़े हो रहे सवाल
रिम्स राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में यदि यहां मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं हो पा रही है तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में सिर्फ इलाज की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती, बल्कि वहां ठहरने वाले लोगों की सुरक्षा, स्वच्छता और आपातकालीन तैयारियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। रिम्स विश्राम सदन की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस हद तक की जा रही है।
अब देखना यह होगा कि रिम्स प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और मरीजों व उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
Reviewed by PSA Live News
on
8:41:00 pm
Rating:

कोई टिप्पणी नहीं: