श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के विशेष पूजन, सुप्रभातम् सेवा और आगम शास्त्रोक्त अनुष्ठानों की तैयारियाँ पूर्ण
राँची। झारखंड की राजधानी राँची स्थित प्रसिद्ध श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में बुधवार 13 मई को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की पावन अपरा अथवा अचला एकादशी व्रत के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों एवं पूजा-अर्चना का भव्य आयोजन किया जाएगा। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण रहेगा तथा भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की आराधना हेतु विभिन्न वैदिक एवं आगम शास्त्रोक्त अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे।
मंदिर प्रबंधन समिति एवं आचार्यों ने बताया कि इस अवसर पर भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर के “मुखोल्लास” एवं भक्तों के कल्याण के लिए श्रीनारदीय पांचरात्र आगम शास्त्र के विधानानुसार विशेष पूजा-पद्धति अपनाई जाएगी। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन “विश्वरूप दर्शन”, “सुप्रभातम् सेवा” एवं अन्य पारंपरिक वैष्णव धार्मिक क्रियाओं से होगा। इसके पश्चात विशेष अर्चना, सहस्त्रनाम पाठ, तुलसी अर्पण, महाभिषेक एवं दिव्य आरती का आयोजन किया जाएगा।
मंदिर के वैदिक विद्वानों के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु एवं श्रीवेंकटेश्वर की विधिवत पूजा करने से व्यक्ति समस्त पापों, कष्टों एवं मानसिक संतापों से मुक्त होकर पुण्यलोक का अधिकारी बनता है। कहा जाता है कि इस एकादशी का व्रत सहस्त्र गोदान के समान फल प्रदान करता है तथा बड़े-बड़े पातकों का भी नाश करता है।
पुराणों में वर्णित महात्म्य के अनुसार संसार के समस्त व्रतों के बराबर फल केवल एकादशी व्रत के पालन से प्राप्त हो सकता है। धर्मग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि तुलसी दल अथवा पुष्पों से श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीहरि वेंकटेश्वर का पूजन करने वाला भक्त पापों से उसी प्रकार अलिप्त रहता है जैसे कमल का पत्ता जल से। वहीं सहस्त्र अश्वमेध यज्ञ और सैकड़ों राजसूय यज्ञ का पुण्य भी एकादशी उपवास की सोलहवीं कला के बराबर नहीं माना गया है।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस दिव्य अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करें। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है तथा भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ भी की गई हैं।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में जब समाज मानसिक तनाव, अशांति और भौतिक चिंताओं से घिरा हुआ है, तब एकादशी जैसे आध्यात्मिक पर्व लोगों को संयम, भक्ति और आत्मशुद्धि का संदेश देते हैं। अपरा एकादशी केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है।
Reviewed by PSA Live News
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9:21:00 pm
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