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संभावित सूखे से निपटने को झारखंड सरकार अलर्ट

खरीफ कर्मशाला में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का सख्त संदेश — “किसानों के हित में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर होगी कार्रवाई”


रांची। 
शिल्पी नेहा तिर्की ने बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला 2026 के दूसरे दिन अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जो पदाधिकारी किसानों के लिए ईमानदारी से काम करेंगे, उन्हें सम्मान मिलेगा, जबकि लापरवाही करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस महत्वपूर्ण कर्मशाला में कृषि मंत्री ने कृषि प्रभाग के कई निदेशकों की अनुपस्थिति पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि राज्य के किसान कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं और ऐसे समय में अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी स्वीकार्य नहीं है।

मानसून कमजोर रहने की आशंका, सरकार ने शुरू की अग्रिम तैयारी

कर्मशाला को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है ताकि किसानों को समय रहते राहत पहुंचाई जा सके।

उन्होंने कहा कि हर जिले को संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कंटिंजेंसी प्लान तैयार करने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका है। इस कर्मशाला में जिलों द्वारा तैयार योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें यह बताया गया कि कम बारिश की स्थिति में किसान किस प्रकार खेती कर सकेंगे और सरकार किस तरह सहायता उपलब्ध कराएगी।

श्रीमती तिर्की ने कहा कि खेती समय पर निर्भर करती है। यदि किसानों को सही समय पर बीज, सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिला, तो पूरी कृषि व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए सभी अधिकारियों को अपने दायित्व को “कर्तव्य नहीं बल्कि धर्म” समझकर निभाना होगा।

“कृषि अधिकारी सेना की तरह करें काम”

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी कृषि पदाधिकारी “एक संगठित सेना” की तरह काम करें। जिला कृषि पदाधिकारी को जिले का नोडल अधिकारी बनाते हुए उन्होंने सभी कृषि प्रभागों को समन्वित रूप से कार्य करने का निर्देश दिया।

उन्होंने 15 मई तक जिला स्तरीय बैठक आयोजित करने का आदेश दिया, जिसमें प्रखंड स्तरीय अधिकारी भी शामिल होंगे। इस बैठक में खरीफ कर्मशाला में तय रणनीति को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई जाएगी। इसकी विस्तृत रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजनी होगी।

20 मई को हर जिले में लगेगा खरीफ मेला

कृषि मंत्री ने घोषणा की कि 20 मई को राज्य के प्रत्येक जिले में “खरीफ मेला” आयोजित किया जाएगा। इसमें कम से कम 500 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। हर प्रखंड से किसानों को जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।

इन मेलों में सॉइल टेस्टिंग काउंटर लगाए जाएंगे, ताकि किसानों को उनकी मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार फसल चयन और उर्वरक उपयोग की जानकारी मिल सके।

इसके साथ ही 22 मई को प्रखंड स्तर पर भी खरीफ मेले आयोजित करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें पंचायत स्तर तक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। हर पंचायत से कम से कम 50 प्रगतिशील किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

एसएचजी और एफपीओ के माध्यम से होगा बीज वितरण

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर पहुंचे, इसके लिए स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से बीज वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को सरकारी योजनाओं और विभागीय सहायता की पूरी जानकारी सरल भाषा में दी जाए।

पशुपालन, मत्स्य और जल संरक्षण पर भी विशेष जोर

कर्मशाला में केवल खेती ही नहीं, बल्कि पशुपालन, मत्स्य पालन और जल संरक्षण को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि पशुओं की दवाइयों की खरीद और वितरण समय पर हो। संबंधित निविदा प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मई माह के अंत तक तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य पूरा कर लिया जाए। जिला मत्स्य पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे मत्स्य बीज की आवश्यकता का आंकलन कर शीघ्र निदेशालय को भेजें और समय पर वितरण सुनिश्चित करें।

इसके अलावा सोलर पंप वितरण, ड्रिप इरिगेशन, भूमि संरक्षण, मधुमक्खी पालन और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया।

जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर जोर

एससी दुबे ने कहा कि आने वाले समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ फसल विविधीकरण अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें कृषि आधारित अन्य गतिविधियों जैसे बागवानी, पशुपालन और मधुमक्खी पालन की ओर भी प्रेरित करना होगा।

वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक खेती की जानकारी

कर्मशाला में कृषि वैज्ञानिकों ने अधिकारियों को वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।

डॉ अखलाक अहमद ने मानसून और मिट्टी के अनुसार धान की उन्नत किस्मों के चयन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समय पर मानसून आने पर धान की बुआई तुरंत शुरू करनी होगी और क्षेत्र के अनुसार बीज चयन बेहद महत्वपूर्ण होगा।

डॉ अशोक कुमार सिंह ने वैज्ञानिक तरीके से धान की खेती, अधिक उपज देने वाली किस्मों, खरपतवार नियंत्रण और भूमि आधारित फसल चयन पर विस्तृत जानकारी दी।

वहीं डॉ अरुण कुमार ने मिलेट्स खेती और मिट्टी संरक्षण के उपायों पर प्रस्तुतीकरण दिया।

सूखे से बचाव पर दिखाई गई विशेष डॉक्यूमेंट्री

कर्मशाला के दौरान संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के उपायों पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। इसमें किसानों को जल संरक्षण, वैकल्पिक फसल, कम पानी वाली खेती और सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में गोपाल जी तिवारी, विकास कुमार, शैलेन्द्र कुमार सहित राज्यभर से आए कृषि पदाधिकारी, वैज्ञानिक और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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