ज्यूरिख, सिंगापुर और कैलिफ़ोर्निया सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ होंगे शामिल, 18 से 22 मई तक चलेगा पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम
रांची। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा में 18 से 22 मई 2026 तक हरित ऊर्जा और डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आयोजन होने जा रहा है। संस्थान के विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभाग द्वारा “सतत हरित ऊर्जा प्रणालियों के लिए उभरती नियंत्रण एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियां” विषय पर पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें हिंदुस्तान सहित दुनिया के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और औद्योगिक समूहों के विशेषज्ञ भाग लेंगे।
यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब हिंदुस्तान वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने तथा वर्ष 2070 तक शून्य-कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम ऊर्जा, डिजिटल नियंत्रण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित आधुनिक तकनीकों पर केंद्रित किया गया है।
चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा विशेष ध्यान
कार्यक्रम के दौरान विद्युत एवं हरित ऊर्जा क्षेत्र की चार अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकों पर विशेष रूप से चर्चा होगी। इनमें—
- विद्युत वाहन प्रणालियां
- स्मार्ट विद्युत ग्रिड तकनीक
- ऊर्जा प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत एवं उनका समेकन
शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यही क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा संरचना को नई दिशा देंगे। ऐसे में अभियांत्रिकी शिक्षकों और शोधकर्ताओं को इन तकनीकों में प्रशिक्षित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
उद्योग और अकादमिक जगत का मजबूत सहयोग
इस कार्यक्रम को कई प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं तकनीकी संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। इनमें GAIL, Jharkhand Renewable Energy Development Agency, क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम, ओपल-आरटी तथा क्रिएटिव रोबोटिक्स जैसी संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि हरित ऊर्जा एवं डिजिटल नियंत्रण तकनीकों में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय तेजी से बढ़ रहा है।
कुलपति के संरक्षण में होगा आयोजन
यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम संस्थान के कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना के संरक्षण में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के अध्यक्ष विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु कुमार मिश्रा हैं, जबकि आयोजन का नेतृत्व संकाय विकास कार्यक्रम समन्वयक डॉ. गौरी शंकर गुप्ता कर रहे हैं।
उद्घाटन और समापन में शामिल होंगे प्रमुख अतिथि
कार्यक्रम का उद्घाटन Steel Authority of India Limited के अनुसंधान एवं विकास केंद्र, रांची के कार्यकारी निदेशक संदीप कुमार कर करेंगे। वहीं समापन सत्र को रांची नगर निगम के आयुक्त आईएएस सुशांत गौरव संबोधित करेंगे। दोनों इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
इटली, चीन और अमेरिका के विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई विशेषज्ञ भाग लेने जा रहे हैं। इटली के पॉलिटेक्निको दी मिलानो के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जियाम्बत्तिस्ता ग्रुओसो विद्युत वाहन चार्जिंग नेटवर्क और संचार प्रणालियों के समेकन पर चर्चा करेंगे। वहीं चीन के साउदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से जुड़े डॉ. ललितेश कुमार फ्यूल सेल प्रणालियों में उन्नत नियंत्रण तकनीकों पर व्याख्यान देंगे।
Microsoft के प्रत्युष आनंद ऊर्जा दक्ष सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर तकनीकों पर प्रस्तुति देंगे। वहीं क्वार्ब्ज इन्फो सिस्टम की अनुप्रयोग अभियंता एरा बाजपेयी डिजिटल नियंत्रण प्रणालियों के लिए हार्डवेयर-इन-द-लूप सिमुलेशन तकनीक को समझाएंगी।
इसके अतिरिक्त भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गोवा, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसएम) धनबाद, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान वारंगल, नागपुर, रायपुर, राउरकेला, तिरुचिरापल्ली और दुर्गापुर सहित कई प्रमुख तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे। बिट्स पिलानी, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद तथा पंजाब अभियांत्रिकी महाविद्यालय, चंडीगढ़ के विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में भाग लेंगे।
बिट मेसरा के विशेषज्ञ भी देंगे तकनीकी सत्र
बिट मेसरा के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु कुमार मिश्रा, डॉ. टी. घोष तथा डॉ. शिवा एस. सरोद सौर ऊर्जा नियंत्रण, हरित हाइड्रोजन तथा स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
19 राज्यों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से 120 से अधिक प्रतिभागियों का पंजीकरण
कार्यक्रम के लिए अब तक हिंदुस्तान के 19 राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों— ईटीएच ज्यूरिख, यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस, सिंगापुर और इंटेल कैलिफ़ोर्निया— से 120 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। यह कार्यक्रम की वैश्विक प्रासंगिकता और बिट मेसरा की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
“हरित ऊर्जा परिवर्तन के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता”
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. गौरी शंकर गुप्ता ने कहा कि हिंदुस्तान का स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन केवल आधारभूत संरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों और शोधकर्ताओं की भी आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों और तेजी से विकसित हो रही औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के बीच की दूरी को कम करने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से संकाय सदस्य स्मार्ट विद्युत ग्रिड, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऊर्जा प्रणालियां, विद्युत गतिशीलता और नवीकरणीय ऊर्जा समेकन जैसे उभरते क्षेत्रों की व्यावहारिक समझ लेकर जाएंगे, जिसका लाभ आने वाले वर्षों में तकनीकी शिक्षा और शोध दोनों को मिलेगा।
रांची और झारखंड के लिए भी महत्वपूर्ण आयोजन
इस आयोजन का रांची में होना झारखंड के लिए भी विशेष महत्व रखता है। लंबे समय तक खनिज और पारंपरिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए पहचाने जाने वाला झारखंड अब सौर ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से नई पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। ऐसे में बिट मेसरा का यह आयोजन पूर्वी हिंदुस्तान को राष्ट्रीय हरित ऊर्जा परिवर्तन अभियान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Reviewed by PSA Live News
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8:05:00 pm
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