अस्पताल प्रबंधकों के साथ उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासन ने दिए स्पष्ट निर्देश, मरीजों के अधिकारों की रक्षा पर जोर
रांची : राजधानी रांची में निजी अस्पतालों द्वारा इलाज के बिल भुगतान को लेकर मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली परेशानियों तथा मृत्यु के बाद शव रोकने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए रांची उपायुक्त (DC) ने शनिवार को जिले के निजी अस्पतालों के प्रबंधकों और संचालकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी परिस्थिति में मरीज की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन शव को बंधक बनाकर नहीं रखेगा। ऐसा करने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जिले के कई बड़े निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, प्रशासनिक पदाधिकारी तथा चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अन्य लोग मौजूद थे। उपायुक्त ने कहा कि अस्पताल सेवा का केंद्र है और मानवता सबसे ऊपर है। किसी परिवार के लिए अपने परिजन की मृत्यु पहले से ही अत्यंत पीड़ादायक स्थिति होती है, ऐसे समय में आर्थिक कारणों से शव रोकना अमानवीय और असंवेदनशील व्यवहार माना जाएगा।
“मानवीय संवेदना सर्वोपरि” : DC
बैठक के दौरान उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि इलाज के भारी-भरकम बिल का भुगतान नहीं होने पर कई निजी अस्पताल मृतक के शव को रोक लेते हैं और भुगतान के बाद ही सौंपते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कई मामलों में कानून और मानवाधिकारों के भी खिलाफ है।
DC ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि किसी मरीज की मृत्यु होती है, तो अस्पताल प्रबंधन तत्काल शव परिजनों को सौंपे। बिल भुगतान को लेकर अलग प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, लेकिन शव को रोकना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों को संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
इलाज और बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का निर्देश
बैठक में उपायुक्त ने निजी अस्पतालों को इलाज के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने का भी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मरीजों के परिजनों को समय-समय पर इलाज की स्थिति, खर्च और आवश्यक चिकित्सा प्रक्रिया की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। कई बार अस्पष्ट बिलिंग और अचानक बढ़ते खर्च के कारण विवाद की स्थिति बनती है।
उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि इलाज शुरू करने से पहले संभावित खर्च की जानकारी लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाए और किसी भी अतिरिक्त प्रक्रिया के लिए परिजनों की सहमति ली जाए। साथ ही अस्पतालों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने का भी निर्देश दिया गया।
गरीब मरीजों और आपातकालीन सेवाओं पर भी चर्चा
बैठक में गरीब और जरूरतमंद मरीजों के इलाज, आयुष्मान भारत योजना के लाभ, आपातकालीन चिकित्सा सेवा तथा रेफरल व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने कहा कि गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों को प्राथमिक उपचार देने से अस्पताल इनकार नहीं कर सकते। आपातकालीन स्थिति में मरीज की जान बचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने अस्पतालों से कहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र मरीजों तक पहुंचाने में सहयोग करें और अनावश्यक रूप से मरीजों को परेशान न किया जाए। आयुष्मान कार्डधारकों को भी बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
शिकायत मिलने पर होगी त्वरित जांच
उपायुक्त ने कहा कि यदि भविष्य में किसी अस्पताल द्वारा शव रोकने, इलाज से इनकार करने, अत्यधिक बिलिंग या मरीजों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत मिलती है, तो जिला प्रशासन तत्काल जांच कर कार्रवाई करेगा। जरूरत पड़ने पर अस्पताल का लाइसेंस, पंजीकरण और अन्य प्रशासनिक पहलुओं की भी समीक्षा की जा सकती है।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर नियमित निगरानी रखी जाए और मरीजों के अधिकारों का उल्लंघन होने पर तत्काल रिपोर्ट तैयार की जाए।
परिजनों और सामाजिक संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
रांची प्रशासन के इस फैसले का सामाजिक संगठनों, मरीज अधिकार समूहों और आम लोगों ने स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि कई बार आर्थिक तंगी के कारण परिवारों को अपने परिजनों का शव लेने के लिए भारी अपमान और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ती थी। ऐसे में प्रशासन का यह कदम मानवीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि निजी अस्पतालों में जवाबदेही तय करने और मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस तरह की पहल जरूरी है। इससे अस्पतालों में पारदर्शिता और संवेदनशीलता दोनों बढ़ेंगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मानवीय बनाने की पहल
रांची जिला प्रशासन की इस पहल को स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक मानवीय और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सा सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। ऐसे में अस्पतालों को लाभ के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी प्राथमिकता देनी होगी।
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में निजी अस्पतालों के संचालन, मरीज सुविधाओं, आपातकालीन सेवाओं और शुल्क व्यवस्था को लेकर और भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं, ताकि आम लोगों को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
Reviewed by PSA Live News
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7:18:00 pm
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