EOU की ताबड़तोड़ रेड में खुली अकूत संपत्ति की परतें, तत्कालीन नगर थानेदार अभिषेक कुमार रंजन की कथित दौलत देख जांच एजेंसियां भी चौंकीं
पटना/किशनगंज/सारण। बिहार में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर शिकंजा कस रही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की बड़ी कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। किशनगंज के तत्कालीन नगर थानेदार एवं वर्तमान में लाइन हाजिर चल रहे अभिषेक कुमार रंजन के खिलाफ हुई ताबड़तोड़ छापेमारी में कथित रूप से करोड़ों रुपये की संपत्ति, निवेश और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज सामने आने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक जांच में जो जानकारियां सामने आई हैं, उन्होंने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार EOU की विशेष टीमों ने एक साथ पटना, किशनगंज और सारण जिले के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय तरीके से की गई थी ताकि किसी भी प्रकार से दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नष्ट न किया जा सके। सुबह शुरू हुई कार्रवाई देर शाम तक जारी रही और इस दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, जमीन से जुड़े कागजात, निवेश संबंधी फाइलें तथा डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।
कई जिलों में फैला था जांच का दायरा
जांच एजेंसी की टीम सबसे पहले पटना के रामकृष्णानगर स्थित आवास पहुंची, जहां कई घंटों तक दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई। इसके अलावा किशनगंज में सरकारी आवास और कार्यालय परिसर में भी तलाशी अभियान चलाया गया। वहीं सारण जिले में पैतृक आवास और अन्य संभावित ठिकानों को भी जांच के दायरे में लिया गया।
सूत्र बताते हैं कि छापेमारी के दौरान ऐसे कई दस्तावेज मिले हैं जिनसे विभिन्न स्थानों पर अचल संपत्तियों में निवेश के संकेत मिलते हैं। कुछ दस्तावेज कथित बेनामी संपत्ति से जुड़े होने की आशंका के आधार पर जांच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों का राजस्व, निबंधन और बैंकिंग रिकॉर्ड से मिलान कर रही है।
आय से अधिक संपत्ति की जांच तेज
EOU को संदेह है कि सरकारी सेवा से प्राप्त वैध आय की तुलना में संपत्ति और निवेश का दायरा कहीं अधिक हो सकता है। इसी आधार पर बैंक खातों, निवेश योजनाओं, बीमा पॉलिसियों, शेयर बाजार में निवेश, नकद लेन-देन और परिवार से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि केवल संपत्ति का मूल्यांकन ही नहीं, बल्कि धन के स्रोत का पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा। इसलिए पिछले कई वर्षों के वित्तीय लेन-देन की पड़ताल शुरू कर दी गई है। आयकर, बैंकिंग और राजस्व विभागों से भी आवश्यक सूचनाएं जुटाई जा रही हैं।
डिजिटल साक्ष्यों की भी हो रही जांच
छापेमारी के दौरान बरामद लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं संपत्तियों और निवेश से जुड़े लेन-देन डिजिटल माध्यमों से तो संचालित नहीं किए गए थे।
सूत्रों का कहना है कि कुछ ऐसे वित्तीय दस्तावेज भी मिले हैं जिनकी गहन जांच के बाद ही वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी। इसलिए फिलहाल एजेंसी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।
पुलिस महकमे में मचा हड़कंप
एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ इतने बड़े स्तर पर हुई कार्रवाई की खबर फैलते ही पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल बन गया। कई अधिकारी और कर्मचारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार हो रही कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी हलचल देखी जा रही है।
आगे क्या?
EOU अब जब्त दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति अभिलेखों और डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण करेगी। जांच में यदि आय से अधिक संपत्ति या अवैध निवेश के पर्याप्त प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही कथित बेनामी संपत्तियों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
फिलहाल EOU की यह कार्रवाई बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की सबसे चर्चित कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासों की संभावना भी बढ़ती जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद जांच एजेंसी कौन-कौन से बड़े खुलासे करती है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
Reviewed by PSA Live News
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9:11:00 am
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