‘जरूरतमंदों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना’ : संजय सर्राफ
रांची। आज के दौर में जब समाज का एक बड़ा वर्ग अपनी व्यक्तिगत व्यस्तताओं में उलझा हुआ है, ऐसे समय में मानवता और सेवा का संदेश देने वाला कार्य समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है। रांची के पुंदाग स्थित श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम में संचालित सेवा गतिविधियां न केवल जरूरतमंदों के जीवन में आशा की किरण जगा रही हैं, बल्कि समाज को यह भी संदेश दे रही हैं कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
परमहंस डॉ. संत शिरोमणि श्री श्री 108 स्वामी सदानंद जी महाराज के सानिध्य में एम.आर.एस. श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट, रांची द्वारा संचालित सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत विगत दो वर्षों से लगातार निराश्रित, मंदबुद्धि, दिव्यांग और बेसहारा लोगों के लिए भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी क्रम में सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम (सत्य-प्रेम सभागार), रांची में रह रहे 48 मंदबुद्धि दिव्यांग एवं निराश्रित प्रभुजनों तथा उनकी देखभाल में लगे सेवादारों के बीच विशेष अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का आयोजन किया गया।
आश्रम परिसर में तैयार किए गए पौष्टिक, स्वादिष्ट एवं विविध व्यंजनों से युक्त भोजन को श्रद्धा और सेवा भाव के साथ निराश्रितों को परोसा गया। इस दौरान आश्रम का वातावरण भक्ति, करुणा और सेवा भावना से ओत-प्रोत दिखाई दिया। भोजन ग्रहण करने वाले निराश्रितों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता स्पष्ट झलक रही थी।
18 दिनों में लगभग चार हजार लोगों तक पहुंची अन्नपूर्णा सेवा
सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि केवल 1 जून से 18 जून तक के 18 दिनों में ही 3,990 निराश्रित प्रभुजनों एवं उनकी सेवा में लगे सेवादारों के बीच अन्नपूर्णा सेवा भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि यह सेवा केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से निराश्रितों को सम्मान, अपनापन और सामाजिक सुरक्षा का भाव भी प्रदान किया जाता है।
उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों के दौरान आश्रम में 1 लाख 40 हजार से अधिक निराश्रितों और जरूरतमंदों को भोजन कराया जा चुका है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो बिना किसी स्वार्थ के सेवा कार्यों में अपना समय, श्रम और संसाधन समर्पित कर रहे हैं।
समाज के सहयोग से आगे बढ़ रहा सेवा का कारवां
संजय सर्राफ ने बताया कि इस विशाल सेवा अभियान में समाज के अनेक लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई है। कई परिवारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वयं भोजन सेवा का दायित्व संभाला, जबकि अनेक दानदाताओं ने खाद्यान्न, वस्त्र, दैनिक उपयोग की सामग्री तथा अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराईं।
उन्होंने कहा कि आश्रम में रह रहे दीनबंधुओं, मंदबुद्धि दिव्यांगों और निराश्रित लोगों के लिए समाज के सहयोग से निरंतर सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे प्रयासों से न केवल जरूरतमंदों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्राप्त होता है।
मानव सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं
इस अवसर पर संजय सर्राफ ने कहा कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों में पूजा-अर्चना का अपना महत्व है, लेकिन भूखे को भोजन, असहाय को सहारा और निराश्रित को संरक्षण देना ईश्वर की सच्ची आराधना है।
उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता ही किसी भी सभ्य समाज की पहचान होती है। यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार एक जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करने का संकल्प ले, तो गरीबी, भूख और उपेक्षा जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सेवा कार्यों में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका
अन्नपूर्णा सेवा के इस पुनीत आयोजन में ट्रस्ट के अध्यक्ष डुंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, निर्मल जालान, मनोज कुमार चौधरी, निर्मल छावनिका, सज्जन पाड़िया, पुजारी अरविंद पांडे, पुरणमल सर्राफ, शिव भगवान अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, नंद किशोर चौधरी, संजय सर्राफ, विशाल जालान, सुनील पोद्दार, मधुसूदन जाजोदिया, विष्णु सोनी, सुरेश चौधरी, अरविंद अग्रवाल, सुरेश भगत, पवन पोद्दार सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे और सेवा कार्यों में योगदान दिया।
मानवता की मिसाल बन रहा सेवाधाम
लगातार दो वर्षों से संचालित यह अभियान केवल भोजन वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में करुणा, संवेदना और परोपकार की भावना को मजबूत करने वाला आंदोलन बन चुका है। हजारों निराश्रितों के जीवन में आशा और सम्मान का संचार करने वाला यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे सेवा कार्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन लोगों तक सहायता पहुंचाने का माध्यम बनते हैं जो अक्सर मुख्यधारा से कट जाते हैं। श्री कृष्ण प्रणामी मंगल राधिका सदानंद सेवाधाम और सद्गुरु कृपा अपना घर आश्रम का यह प्रयास मानवता की सेवा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय और अनुकरणीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।
— रिपोर्ट: PSA Live News
Reviewed by PSA Live News
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9:24:00 am
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