सात बनीं, 19 अधूरी, 13 सिर्फ कागज़ पर — मानसून से पहले निगम की तैयारियों पर बड़े सवाल
राजधानी में हर साल वही कहानी: बारिश आते ही सड़कें बनती हैं तालाब, मोहल्ले बनते हैं जलकुंड
रांची। झारखंड की राजधानी रांची को जलजमाव की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं हर वर्ष बनाई जाती हैं, बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, अधिकारियों की बैठकों में योजनाओं की समीक्षा होती है और जनता को भरोसा दिलाया जाता है कि इस बार मानसून में परेशानी नहीं होगी। लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। शहर में जल निकासी व्यवस्था सुधारने के लिए लगभग 7.23 करोड़ रुपये की लागत से 38 नालियों के निर्माण का दावा किया गया, मगर वास्तविकता यह है कि अब तक केवल सात नालियां ही पूरी हो सकी हैं, जबकि 19 नालियों का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है और 13 परियोजनाएं केवल वर्क ऑर्डर तक सीमित हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया तो क्या रांची फिर से जलजमाव की भयावह स्थिति का सामना करने को मजबूर होगी?
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बढ़ी हलचल, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी
हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नगर विकास विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मानसून के दौरान लोगों को जलजमाव की समस्या से राहत मिलनी चाहिए और जल निकासी व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाए। इसके बाद रांची नगर निगम और संबंधित एजेंसियां सक्रिय जरूर हुईं, लेकिन काम की गति को देखकर ऐसा नहीं लगता कि राजधानी को समय रहते राहत मिल पाएगी।
शहर के विभिन्न वार्डों में चल रहे निर्माण कार्यों की स्थिति बताती है कि अधिकांश स्थानों पर या तो काम अधूरा है या फिर अभी शुरू ही नहीं हो पाया है। कई ठेकेदार भुगतान, तकनीकी अड़चनों और मौसम का हवाला देकर कार्य में देरी कर रहे हैं।
सात नालियां बनीं, मगर क्या इससे बदलेगी तस्वीर?
नगर निगम के अनुसार लगभग 1.14 करोड़ रुपये की लागत से सात नालियों का निर्माण पूरा किया गया है। इनमें वार्ड-40, वार्ड-52, वार्ड-4 और वार्ड-6 के कुछ हिस्सों में आरसीसी नालियां बनाई गई हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था पहले से बेहतर होगी।
लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी जैसे तेजी से फैलते शहर में केवल सात नालियों के निर्माण से व्यापक परिवर्तन संभव नहीं है। जब तक पूरे ड्रेनेज नेटवर्क को एकीकृत तरीके से विकसित नहीं किया जाएगा, तब तक समस्या बनी रहेगी।
19 वार्डों में अधूरा काम, जनता के सिर पर मंडरा रहा खतरा
सबसे चिंताजनक स्थिति उन इलाकों की है जहां नालियों का निर्माण कार्य जारी है लेकिन पूरा होने की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दिख रही।
नामकुम, इंदिरा नगर, शिवपुरी, कैलाश नगर, शांति विहार, लोहरा कोचा, साईं विहार कॉलोनी, दिव्यायन तालाब, दीनदयाल नगर सहित कई इलाकों में नालियों का निर्माण अधूरा है। इन क्षेत्रों में हर वर्ष भारी जलजमाव की शिकायतें आती रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मानसून शुरू होने से पहले निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो इस बार हालात और गंभीर हो सकते हैं। अधूरी नालियां कई बार पानी निकालने के बजाय जलभराव को और बढ़ा देती हैं।
13 योजनाएं केवल फाइलों में, धरातल पर कुछ नहीं
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 13 नालियों के लिए अभी तक केवल वर्क ऑर्डर जारी हुआ है। निर्माण कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मानसून सिर पर है तो क्या इन परियोजनाओं का लाभ इस वर्ष जनता को मिल पाएगा? जानकारों का मानना है कि अब यदि काम शुरू भी किया जाए तो बारिश के बीच निर्माण कार्य करना बेहद कठिन होगा और इससे लागत भी बढ़ सकती है।
नामकुम, हिंदपीढ़ी, पंचशील नगर और कई इलाके सबसे ज्यादा संवेदनशील
रांची के कई इलाके वर्षों से जलजमाव के लिए बदनाम रहे हैं। नामकुम जोरार, हिंदपीढ़ी, पंचशील नगर, हरमू, बरियातू, लालपुर, मोराबादी और पंडरा जैसे क्षेत्रों में थोड़ी सी तेज बारिश के बाद सड़कें पानी में डूब जाती हैं।
हाल ही में नगर आयुक्त द्वारा पंचशील नगर का निरीक्षण किया गया, जहां नालियों पर अतिक्रमण करने वाले 23 भवन मालिकों को नोटिस जारी किया गया। अधिकारियों ने माना कि जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण भी जलजमाव की बड़ी वजह है।
जलजमाव की असली वजह केवल नालियों की कमी नहीं
विशेषज्ञ बताते हैं कि रांची की समस्या केवल नालियों की संख्या नहीं है, बल्कि शहरी नियोजन की खामियां भी हैं।
- प्राकृतिक जलस्रोतों का अतिक्रमण
- वर्षा जल निकासी मार्गों का अवरुद्ध होना
- अनियोजित कॉलोनियों का विस्तार
- नालियों की नियमित सफाई का अभाव
- निर्माण सामग्री और कचरे का नालियों में जमा होना
ये सभी कारण मिलकर हर वर्ष जलजमाव को और गंभीर बना देते हैं।
हटिया डैम और शहर के कई जलस्रोतों के कैचमेंट क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को लेकर भी वर्षों से चिंता जताई जाती रही है।
करोड़ों खर्च, लेकिन जनता पूछ रही—राहत कब मिलेगी?
रांचीवासियों का कहना है कि हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जलजमाव की समस्या खत्म क्यों नहीं हो रही। यदि योजनाएं समय पर पूरी नहीं होतीं और गुणवत्ता पर निगरानी नहीं रहती, तो सरकारी धन का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाता।
शहर के कई वार्डों में लोग आशंका जता रहे हैं कि पहली भारी बारिश के बाद एक बार फिर सड़कें तालाब में बदल जाएंगी, घरों में पानी घुसेगा और लोगों को घंटों जाम व परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
मानसून की पहली परीक्षा में फेल हुआ तो जवाबदेह कौन?
रांची नगर निगम ने दावा किया है कि जलजमाव वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर विशेष तैयारी की जा रही है और नालियों के निर्माण, चौड़ीकरण तथा सफाई का काम जारी है।
लेकिन जब 38 में से केवल सात परियोजनाएं पूरी हुई हों, तब यह दावा जनता के मन में भरोसा पैदा नहीं कर पा रहा। आने वाले दिनों में मानसून की पहली तेज बारिश ही यह तय करेगी कि करोड़ों रुपये की ये परियोजनाएं वास्तव में राहत देने वाली हैं या फिर राजधानी एक बार फिर जलजमाव, अव्यवस्था और प्रशासनिक दावों के बीच फंसी नजर आएगी।
(विशेष रिपोर्ट)
अशोक कुमार झा
संपादक, रांची दस्तक एवं PSA Live News
Reviewed by PSA Live News
on
4:27:00 pm
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