पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा पर भक्ति में सराबोर हुआ रांची, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया श्री धोली सती दादी जी महोत्सव
"धोली सती मैया, कर दो सबका बेड़ा पार" के जयघोष से गूंजा वातावरण
रांची। पुरुषोत्तम मास पूर्णिमा के पावन एवं पुण्यदायी अवसर पर राजधानी रांची के लालपुर चौक स्थित साकेत सर्राफ के आवास पर आयोजित श्री धोली सती दादी जी महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम संगम बन गया। श्री धोली सती दादी महिला समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक उत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर दादी जी के श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की तथा परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की मंगलकामना की।
पूरे आयोजन स्थल को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी सजावट और मनमोहक विद्युत रोशनी से सजाया गया था। जैसे ही श्रद्धालुओं ने दादी जी के दिव्य एवं अलौकिक स्वरूप का दर्शन किया, वातावरण भक्तिभाव से ओत-प्रोत हो उठा। दादी जी का विशेष श्रृंगार और सजीव झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। उपस्थित महिलाओं ने पुष्प अर्पित कर दादी जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात सामूहिक मंगल पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भाग लेते हुए दादी जी की महिमा का गुणगान किया। मंगल पाठ के दौरान पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता दिखाई दिया।
महोत्सव का सबसे आकर्षक और भावनात्मक पक्ष भजन-कीर्तन रहा। समिति की सक्रिय सदस्या शशि सर्राफ एवं सविता सर्राफ सहित अन्य महिला श्रद्धालुओं ने अपनी मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों से भक्तों को भावविभोर कर दिया। भक्ति रस में डूबे भजनों की प्रस्तुति के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भावनाओं से नम हो गईं।
प्रमुख भजनों में—
"दादी जी के दर पर आए, मन को मिला विश्राम..."
"धोली सती मैया, कर दो सबका बेड़ा पार..."
"आज पूर्णिमा के दिन दादी, तुम घर-घर दीप जलाओ..."
जैसे भजनों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। भजनों की मधुर स्वर लहरियों के बीच उपस्थित महिलाओं ने नृत्य एवं भक्ति भाव से दादी जी की आराधना की और अपने परिवारों की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य तथा समृद्धि की प्रार्थना की।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने दादी जी की महिमा और उनके जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों का भी स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि दादी जी का जीवन त्याग, समर्पण, साहस और नारी शक्ति का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
महोत्सव के समापन अवसर पर सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। दीपों की जगमगाहट और जयकारों के बीच जब दादी जी की महाआरती हुई तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। इसके पश्चात सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर श्री धोली सती दादी प्रचार समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा कि "श्री धोली सती दादी जी नारी शक्ति, साहस, त्याग और संरक्षण की प्रतीक हैं। उनकी आराधना से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक एकता को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।"
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, संस्कारों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।
कार्यक्रम में शशि सर्राफ, सविता सर्राफ, करुणा बागला, कविता सर्राफ, मधु सर्राफ, श्वेता सर्राफ, रेनू सर्राफ, ममता सर्राफ, संजीता सर्राफ, मंगला बागला, अनुराधा, रीना, विनीता, निधि, सावित्री, दीप्ति, सपना, माया, सीतू सहित बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।
भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण यह आयोजन उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना, बल्कि सामाजिक समरसता, महिला सहभागिता और सांस्कृतिक चेतना का भी एक प्रेरणादायी उदाहरण सिद्ध हुआ। श्री धोली सती दादी जी महोत्सव की मधुर स्मृतियां लंबे समय तक श्रद्धालुओं के हृदय में भक्तिभाव का संचार करती रहेंगी।
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