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रांची में तिरुपति बालाजी महोत्सव की भव्यता चरम पर: भगवान श्रीवेंकटेश्वर संग श्रीपद्मावती का नगर भ्रमण, मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान हुआ शहर


रांची, 27 जून। 
श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में आयोजित त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव सह कल्याणोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान श्रीवेंकटेश्वर, श्रीपद्मावती तथा श्रीश्रीदेवी-भूमिदेवी के दिव्य नगर भ्रमण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, वैदिक मंत्रोच्चार, दक्षिण भारतीय वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और भजनों की रसधार ने रांची को मानो एक दिव्य आध्यात्मिक नगरी में परिवर्तित कर दिया।


प्रातःकाल भगवान श्रीनिवास अपनी पटरानियों श्रीपद्मावती, श्रीश्रीदेवी एवं श्रीभूमिदेवी के साथ अलौकिक श्रृंगार से सुसज्जित होकर भव्य पालकी में विराजमान हुए। जैसे ही शोभायात्रा मंदिर परिसर से निकली, श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालु हाथ जोड़कर भगवान का स्वागत कर रहे थे और उनके दर्शन मात्र से स्वयं को धन्य अनुभव कर रहे थे।

शोभायात्रा में श्रीधाम वृंदावन से पधारे जगतगुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज अपने सहयोगी श्रीगोविंद दास जी महाराज एवं अन्य संतों के साथ रथ पर सवार होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान कर रहे थे। उनके दर्शन और सान्निध्य ने पूरे आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया।


यात्रा के दौरान बैंड-बाजों की मधुर धुन, दक्षिण भारत के प्रसिद्ध वाद्ययंत्र ‘नादस्वरम्’ की दिव्य स्वर लहरियां तथा वैदिक मंत्रों की गूंज वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रही थी। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए नृत्य कर रहे थे और "गोविंदा-गोविंदा", "वेंकटेश्वर भगवान की जय" तथा "जय श्रीनिवास" के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।

रांची के प्रसिद्ध भजन गायक श्री ओम शर्मा एवं उनकी मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भजन संध्या के स्वर नगर भ्रमण के साथ-साथ बहते रहे और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते रहे।

शोभायात्रा की एक विशेष आकर्षण 201 ध्वजाधारी श्रद्धालु महिलाओं एवं कन्याओं की सहभागिता रही। सभी पीले परिधानों में कतारबद्ध होकर भगवान के आगे-आगे चल रही थीं, जिससे शोभायात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी और दिव्य प्रतीत हो रहा था। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान की मंगल आरती की गई तथा प्रसाद वितरण किया गया। अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया गया।

नगर भ्रमण के पश्चात संध्या चार बजे से मंदिर परिसर स्थित यज्ञ मंडपम में भव्य सुदर्शन महायज्ञ का आयोजन हुआ। कांचीपुरम से पधारे प्रकाण्ड विद्वान आचार्य श्रीवत्स भट्टर के नेतृत्व में विजय राघवन, रंगराज भट्टर, मालू भट्टर तथा जगन्नाथन ने दक्षिणात्य वैदिक परंपरा के अनुसार यज्ञ संपन्न कराया।

महायज्ञ में पुरुषसूक्त, श्रीसूक्त, भूसूक्त, नीलासूक्त, सुदर्शन मालामंत्रम्, सुदर्शन गायत्री, सुदर्शनाष्टकम्, गरुड़ गायत्री, हनुमान गायत्री, नरसिंह गायत्री एवं भाग्यसूक्त सहित अनेक वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञ के दौरान पूरा वातावरण वैदिक मंत्रों की दिव्य ध्वनि से गुंजायमान रहा। अंत में नवग्रह मंत्रों के साथ पूर्णाहुति दी गई तथा क्षमा प्रार्थना कर यज्ञ संपन्न हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

अनुष्ठान में मुख्य यजमान के रूप में वरपक्ष से श्री रामअवतार नरसरिया एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शारदा नरसरिया उपस्थित रहे। वहीं वधुपक्ष से श्रीश्रीदेवी की ओर से श्री रमेश धरनीधरका एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शशि धरनीधरका तथा श्रीभूमिदेवी की ओर से श्री शशांक धरनीधरका एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सौम्या धरनीधरका ने यजमान की भूमिका निभाई।

आयोजन को सफल बनाने में अनूप अग्रवाल, प्रदीप नरसरिया, अनीश अग्रवाल, मुरारी लाल मंगल, उदय राठौर, कन्हैया लोहिया, राजेश सुल्तानिया, सुशील लोहिया, सुशील गरोदिया, श्रवण खंडेलवाल, अंशु मित्तल सहित अनेक कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

महोत्सव का समापन रविवार को होने वाले बहुप्रतीक्षित श्रीवेंकटेश्वर कल्याणोत्सव के साथ होगा। श्रीनिवास टावर स्थित श्रीभगवान दास सत्संग हॉल में भगवान श्रीवेंकटेश्वर एवं माता पद्मावती के दिव्य वैवाहिक उत्सव का आयोजन किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार इस भव्य धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

धार्मिक, सांस्कृतिक और वैदिक परंपराओं के अद्भुत संगम के रूप में आयोजित यह महोत्सव न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि रांची की सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है। भगवान श्रीवेंकटेश्वर के दिव्य नगर भ्रमण और सुदर्शन महायज्ञ ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया, जिससे पूरा शहर भक्ति के रंग में रंग गया।

रांची में तिरुपति बालाजी महोत्सव की भव्यता चरम पर: भगवान श्रीवेंकटेश्वर संग श्रीपद्मावती का नगर भ्रमण, मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान हुआ शहर  रांची में तिरुपति बालाजी महोत्सव की भव्यता चरम पर: भगवान श्रीवेंकटेश्वर संग श्रीपद्मावती का नगर भ्रमण, मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान हुआ शहर Reviewed by PSA Live News on 12:08:00 am Rating: 5

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