पीएमएफएमई योजना से बदली जिंदगी: विष्णु प्रसाद चौधरी ने खड़ा किया पापड़ उद्योग, बने आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन के प्रतीक
मधुबनी, 27 जून 2026। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) आज ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की नई इबारत लिख रही है। मधुबनी जिले के मधेपुर प्रखंड निवासी विष्णु प्रसाद चौधरी इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने इस योजना का लाभ उठाकर न केवल अपना स्वयं का पापड़ उद्योग स्थापित किया, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विष्णु प्रसाद चौधरी पहले से ही व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित करने का सपना संसाधनों और पूंजी की कमी के कारण अधूरा था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की जानकारी मिली। उन्होंने उद्योग विभाग से संपर्क किया और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर योजना के तहत लगभग 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त की। इस सहयोग ने उनके सपनों को नई उड़ान दी और 17 सितंबर 2024 को उन्होंने अपने उद्योग की औपचारिक शुरुआत कर दी।
"श्याम पापड़ उद्योग" बना पहचान का नया नाम
विष्णु प्रसाद चौधरी ने अपने उद्यम का नाम "श्याम पापड़ उद्योग" रखा। उद्योग की शुरुआत पापड़ निर्माण से हुई, लेकिन बाद में उन्होंने बाजार की मांग को देखते हुए बड़ी और अदौरी जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पादों का निर्माण भी शुरू कर दिया। गुणवत्ता और स्वाद को प्राथमिकता देने के कारण उनके उत्पाद धीरे-धीरे स्थानीय बाजार में लोकप्रिय होने लगे।
आज स्थिति यह है कि श्याम पापड़ उद्योग के उत्पाद मधुबनी जिले के अलावा आसपास के कई जिलों में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। स्थानीय दुकानदारों और ग्राहकों के बीच इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण परिवेश में तैयार होने वाले इन उत्पादों ने उपभोक्ताओं का विश्वास जीता है।
संघर्षों से मिली सफलता
हर सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी होती है और विष्णु प्रसाद चौधरी की यात्रा भी इससे अलग नहीं है। उद्योग की स्थापना के शुरुआती दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी समस्या प्रशिक्षित कारीगरों की कमी थी। स्थानीय स्तर पर कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं होने के कारण गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में कठिनाइयां आ रही थीं।
स्थिति को देखते हुए उन्हें दूसरे जिलों से प्रशिक्षित कारीगर बुलाने पड़े। इससे लागत बढ़ी, लेकिन उन्होंने गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। दूसरी ओर, नए उत्पादों को बाजार में स्थापित करना भी आसान नहीं था। शुरुआती दौर में बिक्री कम थी और ग्राहकों का विश्वास जीतने में समय लगा। लेकिन निरंतर मेहनत, बेहतर गुणवत्ता और ग्राहकों की संतुष्टि ने धीरे-धीरे उनके उद्योग को सफलता के मार्ग पर पहुंचा दिया।
रोजगार सृजन में निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका
श्याम पापड़ उद्योग केवल एक व्यावसायिक इकाई नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। वर्तमान में इस उद्योग में पांच लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त है। ये सभी स्थानीय लोग हैं, जिन्हें अपने क्षेत्र में ही काम करने का अवसर मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार छोटे-छोटे खाद्य उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित होते रहे तो बेरोजगारी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
महिलाओं के लिए भी अवसर
पापड़, बड़ी और अदौरी जैसे उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी की अपार संभावनाएं हैं। विष्णु प्रसाद चौधरी का मानना है कि भविष्य में उद्योग के विस्तार के साथ अधिक महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी।
भविष्य की बड़ी योजनाएं
विष्णु प्रसाद चौधरी अब अपने उद्योग को और बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक मशीनों का उपयोग कर उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग को और बेहतर बनाना है। वे अपने उत्पादों को बिहार के अन्य जिलों तथा राज्य के बाहर के बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं।
उनका मानना है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए तो कोई भी युवा स्वरोजगार के क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकता है। वे चाहते हैं कि उनके उद्योग के विस्तार के साथ अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिले और स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास को गति मिले।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने विष्णु प्रसाद चौधरी
अपने अनुभव साझा करते हुए विष्णु प्रसाद चौधरी कहते हैं, "शुरुआत में कठिनाइयां जरूर आती हैं, लेकिन यदि आत्मविश्वास, धैर्य और मेहनत बनी रहे तो सफलता अवश्य मिलती है। सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर युवा अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।"
उनकी सफलता कहानी आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। यह उदाहरण साबित करता है कि यदि सही दिशा, सरकारी सहयोग और दृढ़ संकल्प मिल जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों से भी सफल उद्यमी तैयार हो सकते हैं।
पीएमएफएमई योजना साबित हो रही वरदान
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराना है। विष्णु प्रसाद चौधरी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यह योजना वास्तव में ग्रामीण उद्यमियों के लिए वरदान साबित हो रही है।
मधेपुर के एक साधारण व्यवसायी से सफल उद्योगपति बनने तक का विष्णु प्रसाद चौधरी का सफर यह संदेश देता है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लेकर आत्मनिर्भर हिंदुस्तान के निर्माण में हर नागरिक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनकी यह उपलब्धि न केवल मधुबनी बल्कि पूरे बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा और आशा की नई किरण बनकर सामने आई है।
Reviewed by PSA Live News
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7:47:00 pm
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