भक्ति, सेवा और वैदिक परंपराओं के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर का नवम वार्षिकोत्सव
विदाई समारोह में आचार्यों, वेदपाठियों, नादस्वर कलाकारों एवं सेवाभावियों का हुआ भव्य सम्मान, जगद्गुरु अनिरुद्धाचार्य जी ने दिया सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश
राँची। रातू रोड स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (श्री तिरुपति बालाजी) मंदिर में आयोजित नवम वार्षिकोत्सव सह कल्याणोत्सव समारोह के सफल एवं भव्य समापन के उपरांत सोमवार को एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय यह धार्मिक महोत्सव 26 जून से 28 जून 2026 तक अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान श्रीनिवास और माता पद्मावती का आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह के समापन अवसर पर मंदिर प्रबंधन द्वारा उन सभी विद्वान आचार्यों, वेदपाठियों, नादस्वर वादकों, पालकी वाहकों तथा रसोई सेवा से जुड़े सेवाभावियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने पूरे उत्सव को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सम्मान समारोह के दौरान सभी को श्रद्धा एवं आदर के प्रतीक स्वरूप अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
इस अवसर पर अनुष्ठान संपन्न कराने वाले विद्वान आचार्यों में श्रीवत्स भट्टर, श्री मालू भट्टर, श्री रंगराज भट्टर, श्रीनिवास तथा विजय राघवन प्रमुख रूप से उपस्थित थे। वहीं वैदिक मंत्रोच्चार और वेदपाठ की पवित्र ध्वनि से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाले वेदपाठियों में राजू वैद्य, बालाजी स्वामी, जगन्नाथन एवं षट्कोपण स्वामी की मंडली शामिल रही।
महोत्सव के दौरान दक्षिण भारतीय मंदिर परंपरा के अनुरूप नादस्वर वादन ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। नादस्वर कलाकार बरनी, पुरवरसन, आनंद बाबू, शिव, मणिकन्नन एवं संतोष ने अपनी मधुर प्रस्तुति से धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। वहीं भगवान की शोभायात्रा एवं पालकी सेवा में श्री बाबू, कार्तिक, विजय कुमार, राजा गणेश, मणिकन्नन, दास, अन्नामलई और शंकर की टोली ने निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं प्रदान कीं।
श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था में भी अनेक सेवाभावियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्रीमती अनुराधा, श्री सुदर्शन, श्रीनिवासन, कन्नन एवं अन्नादुरई सहित रसोई सेवा से जुड़े सभी सहयोगियों की समर्पित सेवाओं की सराहना की गई। मंदिर प्रबंधन ने कहा कि इन सभी के अथक प्रयासों के कारण ही हजारों श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित रूप से प्रसाद वितरण एवं अन्य व्यवस्थाओं का लाभ प्राप्त हो सका।
समारोह को संबोधित करते हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने सभी सेवाभावियों, आचार्यों और भक्तों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन की सफलता केवल अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामूहिक सहयोग की भावना से सुनिश्चित होती है। उन्होंने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए सनातन धर्म की परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
मंदिर संचालन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्री राम अवतार नारसरिया ने सभी अतिथियों, आचार्यों और सेवाभावियों को अंगवस्त्र एवं सम्मान राशि भेंट कर उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का वार्षिकोत्सव एवं कल्याणोत्सव अभूतपूर्व रूप से सफल रहा और इसमें राँची सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता देखने को मिली।
विदाई समारोह से पूर्व प्रधान आचार्य श्रीवत्स भट्टर एवं उनके सहयोगी आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर की स्तुति, प्रशंसा एवं अनुशंसा की। इसके पश्चात यजमानों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए स्वस्तिवाचन कर उनके सुख, समृद्धि, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति की मंगलकामना की गई। वैदिक ऋचाओं और मंत्रों की गूंज से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज आगामी 1 जुलाई को श्रीधाम वृंदावन के लिए प्रस्थान करेंगे। उनके प्रस्थान तक राँची एवं आसपास के क्षेत्रों के शिष्य, अनुयायी और श्रद्धालु उनसे प्रतिदिन आध्यात्मिक मार्गदर्शन, उपदेश एवं आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे।
विदाई समारोह के साथ ही नवम वार्षिकोत्सव सह कल्याणोत्सव का सफल समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा, संस्कृति और वैदिक परंपराओं के अद्भुत संगम के रूप में अनुभव किया। मंदिर परिसर में तीन दिनों तक चला यह महोत्सव श्रद्धालुओं के हृदय में लंबे समय तक आध्यात्मिक स्मृतियों के रूप में जीवंत रहेगा।
Reviewed by PSA Live News
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6:54:00 pm
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