भगवद्भक्ति में डूबा राँची: जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज के प्रवचन सुन भक्त हुए भाव-विभोर
राँची। रातू रोड स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (श्री तिरुपति बालाजी) मंदिर में मंगलवार को आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान के अद्भुत संगम का साक्षी बना। श्रीधाम वृंदावन से पधारे जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं ज्ञानवर्धक प्रवचनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति, वैराग्य और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उनके अमृतमय वचनों को सुनकर मंदिर परिसर में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे तथा पूरा वातावरण हरिनाम संकीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया।
अपने प्रवचन में महाराज श्री ने मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मानव शरीर नौ द्वारों और असंख्य छिद्रों वाला नश्वर शरीर है, जो निरंतर परिवर्तनशील है। मनुष्य इस शरीर की स्वच्छता और सजावट में अपना अधिकांश समय व्यतीत करता है, किन्तु यह शरीर अंततः नाशवान है। उन्होंने कहा कि शरीर के प्रति अत्यधिक मोह, ममता और आसक्ति ही जीव को संसार के बंधनों में जकड़े रखती है। यदि यही प्रेम, मोह और समर्पण भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया जाए, तो मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है और वह ईश्वर की प्राप्ति का अधिकारी बन जाता है।
जगद्गुरु ने कहा कि भगवान अत्यंत सरल, सहज और करुणामय हैं। वे अपने भक्तों की पुकार की प्रतीक्षा करते रहते हैं। जिस क्षण कोई श्रद्धा और विश्वास के साथ उन्हें स्मरण करता है, उसी क्षण भगवान उसकी सहायता के लिए तत्पर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि संसार में जिन वस्तुओं, व्यक्तियों और संबंधों के प्रति मनुष्य मोह रखता है, वे सभी क्षणभंगुर हैं। आज जो हमारे साथ हैं, वे कल नहीं भी हो सकते हैं, किन्तु परमात्मा ही ऐसे हैं जो सदा, सर्वत्र और प्रत्येक परिस्थिति में हमारे साथ रहते हैं। भगवान ही हमारे वास्तविक मित्र, संरक्षक और सच्चे साथी हैं।
महाराज श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में धर्म, भक्ति, सेवा और सदाचार को अपनाएं तथा भगवान के नाम का निरंतर स्मरण करें। उन्होंने कहा कि ईश्वर का नाम ही कलियुग में सबसे बड़ा साधन और सबसे बड़ा सहारा है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है, उसके जीवन के अनेक कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं।
प्रवचन के दौरान मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भगवान की महिमा का श्रवण करते रहे। अनेक भक्तों की आंखें भक्ति भाव से नम हो गईं और पूरा वातावरण आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत हो उठा। सद्वचनों की अमृतधारा में अवगाहन कर श्रद्धालुओं ने आत्मिक शांति और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
प्रवचन के उपरांत प्रातः 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक भक्त मंडली द्वारा संगीतमय सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन किया गया। भगवान श्रीराम की महिमा से युक्त सुंदरकांड के मधुर पाठ ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। पूर्णाहुति के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच सूजी के हलवे का प्रसाद वितरित किया गया, जिसे भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा के साथ ग्रहण किया।
इस अवसर पर मंदिर के अर्चक श्री सत्यनारायण गौतम, श्री गोपेश आचार्य एवं श्री नारायण दास जी सहित श्रीधाम वृंदावन से पधारे दामोदर दास जी, भागीरथ जी, गणेश जी एवं वेणुगोपाल जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री रामअवतार नारसरिया, श्री अनूप अग्रवाल, श्री रंजन सिंह सहित मंदिर प्रबंधन समिति एवं समस्त भक्तजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन के सफल संचालन के लिए उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंदिर समिति के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की कामना की।
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7:54:00 pm
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