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भगवान बिरसा मुंडा संघर्ष, स्वाभिमान और जनजागरण के अमर नायक: संजय सर्राफ


हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, आदिवासी समाज के गौरव और जननायक भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि प्रत्येक वर्ष 9 जून को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। वर्ष 1900 में इसी दिन मात्र 25 वर्ष की आयु में उनका निधन तत्कालीन बिहार (वर्तमान झारखंड) के रांची कारागार में हुआ था। उनकी पुण्यतिथि केवल एक महान योद्धा को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है,बल्कि सामाजिक न्याय, स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और राष्ट्रीय चेतना के उनके संदेश को स्मरण करने का भी दिन है।भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातू गांव में एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ था। बचपन से ही वे तेजस्वी, साहसी और नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण थे। उस समय अंग्रेजी शासन और जमींदारी व्यवस्था के कारण आदिवासी समाज शोषण, अत्याचार और आर्थिक उत्पीड़न का सामना कर रहा था। बिरसा मुंडा ने इस अन्याय के विरुद्ध जनजागरण का अभियान चलाया और लोगों को अपने अधिकारों के लिए संगठित किया।उन्होंने आदिवासी समाज में फैली सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, शिक्षा, स्वच्छता और नैतिक जीवन को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने लोगों को अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक आस्था के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। इसी कारण आदिवासी समाज उन्हें श्रद्धापूर्वक धरती आबा अर्थात धरती का पिता कहकर संबोधित करता है। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में वर्ष- 1899 में अंग्रेजों और शोषक जमींदारों के विरुद्ध प्रसिद्ध उलगुलान (महाविद्रोह) का सूत्रपात हुआ। इस आंदोलन का उद्देश्य आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर उनके पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना तथा विदेशी शासन से मुक्ति प्राप्त करना था। उनके संघर्ष ने अंग्रेजी शासन को झकझोर दिया और बाद में आदिवासी भूमि अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कानून बनाने की दिशा में प्रेरणा दी।उनकी पुण्यतिथि का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को उनके साहस, त्याग, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक समरसता के आदर्शों से परिचित कराना है। यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि समाज की एकता, अपने अधिकारों की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष से ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।आज भगवान बिरसा मुंडा भारतीय इतिहास के ऐसे अमर नायक हैं, जिनका जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और जनसेवा की अद्वितीय मिसाल है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएं।

भगवान बिरसा मुंडा संघर्ष, स्वाभिमान और जनजागरण के अमर नायक: संजय सर्राफ भगवान बिरसा मुंडा संघर्ष, स्वाभिमान और जनजागरण के अमर नायक: संजय सर्राफ Reviewed by PSA Live News on 8:02:00 am Rating: 5

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