अनन्त कोटि ब्रह्मांड के अधिनायक भगवान श्रीनिवास का आकाशतनया पद्मावती संग हुआ पाणिग्रहण संस्कार, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास में डूबा रांची
रांची, 28 जून। रातू रोड स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में आयोजित त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव सह कल्याणोत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिन रविवार को भक्ति, श्रद्धा, वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (श्रीनिवास) एवं माता पद्मावती के दिव्य पाणिग्रहण संस्कार और कल्याणोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मंदिर परिसर से लेकर श्रीनिवास टावर स्थित श्रीभगवान दास सत्संग हॉल तक श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी रही।
सुबह से ही कल्याण मंडप को दक्षिण भारतीय वैदिक परंपरा के अनुरूप भव्य रूप से सजाया गया था। जूही, बेला और गुलाब के पुष्पों की मनमोहक सजावट तथा उनकी सुगंध से पूरा वातावरण सुवासित हो उठा था। मंच पर दूल्हा स्वरूप भगवान श्रीवेंकटेश्वर और दुल्हन स्वरूप माता पद्मावती का अलौकिक श्रृंगार ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं वैकुण्ठ धाम धरती पर उतर आया हो। भगवान और माता की मोहक छवि के दर्शन मात्र से श्रद्धालु स्वयं को धन्य अनुभव कर रहे थे।
प्रातः 9 बजे वधू पक्ष के यजमान श्री रमेश-शशि धरनीधरका एवं शशांक-सौम्या धरनीधरका अपने परिवार सहित विवाह का मुकलावा लेकर कल्याण मंडप पहुंचे। वहां वर पक्ष के मुख्य यजमान श्री रामअवतार-शारदा नारसरिया तथा राहुल-अदिति नारसरिया सहित अन्य श्रद्धालुओं ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। वैदिक रीति-रिवाजों के साथ आरंभ हुए इस दिव्य विवाह समारोह में जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य जी महाराज, श्री गोविंद दास जी तथा वृंदावन से पधारे संत-महात्मा और आचार्यगण विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कांचीपुरम से आए वैदिक आचार्यों द्वारा वैवाहिक मंत्रोच्चार, सामगायन और वैदिक अनुष्ठानों का संचालन किया गया। दक्षिण भारत के पारंपरिक नादस्वरम वाद्य की मंगलमयी ध्वनि के बीच संपन्न हुए इस दिव्य पाणिग्रहण संस्कार ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंत्रों की गूंज, शंखध्वनि और जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। अनेक श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते, नृत्य करते और भगवान के विवाहोत्सव के साक्षी बन स्वयं को सौभाग्यशाली मान रहे थे।
बहुप्रतीक्षित "श्रीश्रीनिवास पद्मावती कल्याणम्" के साथ तीन दिवसीय महोत्सव का भव्य समापन हुआ। श्रीनिवास टावर स्थित श्रीभगवान दास सत्संग हॉल में आयोजित इस वैवाहिक महोत्सव में मुख्य यजमानों के अतिरिक्त 251 सह-यजमानों ने भाग लिया। इनमें रांची सहित झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु शामिल थे। इस अवसर पर हजारों भक्तों ने भगवान के दिव्य कल्याणोत्सव में सहभागिता कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
धार्मिक, सांस्कृतिक और वैदिक परंपराओं के अद्भुत समन्वय के रूप में आयोजित यह महोत्सव न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना, बल्कि रांची की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाई प्रदान करने वाला सिद्ध हुआ। मंदिर परिसर से लेकर श्रीनिवास टावर के चारों तल श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। भक्ति, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण ने पूरे शहर को मानो भगवान वेंकटेश्वर की भक्ति में सराबोर कर दिया।
आयोजकों के अनुसार इस वर्ष का कल्याणोत्सव अब तक के सबसे भव्य आयोजनों में से एक रहा। तीन दिनों तक चले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नगर भ्रमण, वैदिक पूजन और दिव्य कल्याणोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भगवान श्रीवेंकटेश्वर एवं माता पद्मावती के दिव्य विवाहोत्सव के माध्यम से सनातन धर्म की वैदिक परंपराओं, पारिवारिक मूल्यों तथा आध्यात्मिक संस्कृति का संदेश जन-जन तक पहुंचा।
कार्यक्रम की सफलता में मंदिर समिति एवं स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन में प्रमुख रूप से सर्वश्री अनूप अग्रवाल, प्रदीप नारसरिया, विनय धरनीधरका, अनीश अग्रवाल, कन्हैया लोहिया, आनंद प्रकाश अग्रवाल, उदय राठौर, बीनू ठक्कर, अनंत अग्रवाल, श्रवण खंडेलवाल, सुशील गरोदिया, मुरारी लाल मंगल, राजेश सुल्तानिया, सुशील लोहिया, विक्की लोहिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
भगवान श्रीवेंकटेश्वर और माता पद्मावती के इस दिव्य कल्याणोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि रांची केवल औद्योगिक और शैक्षणिक नगरी ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति की भी एक महत्वपूर्ण भूमि है। भगवान के दिव्य पाणिग्रहण संस्कार के साथ संपन्न हुए इस भव्य महोत्सव की स्मृतियां श्रद्धालुओं के हृदय में लंबे समय तक जीवंत रहेंगी।
Reviewed by PSA Live News
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7:38:00 am
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