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दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्मभूषण : झारखंड के संघर्ष, अस्मिता और स्वाभिमान को मिला राष्ट्रीय सम्मान

भारत रत्न देने की भी उठी मांग, झामुमो ने कहा— यह सम्मान करोड़ों लोगों के आंदोलन और बलिदान की पहचान


रांची, 23 जून।
झारखंड आंदोलन के महानायक, दिशोम गुरु Shibu Soren को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान दिए जाने पर पूरे झारखंड में गौरव और भावनाओं का माहौल है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव Vinod Kumar Pandey ने इस सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता, आदिवासी समाज के संघर्ष, जल-जंगल-जमीन की रक्षा के आंदोलन और अलग राज्य की लंबी लड़ाई में शामिल लाखों लोगों के त्याग और बलिदान का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु का संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, आदिवासी अधिकारों, किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। झारखंड के एक छोटे से गांव नेमरा से शुरू हुआ उनका संघर्ष कालांतर में एक विशाल जनआंदोलन में परिवर्तित हुआ, जिसने देश के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा और अंततः अलग झारखंड राज्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।

जल, जंगल और जमीन की लड़ाई के प्रतीक थे गुरुजी

विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि शिबू सोरेन ने उस दौर में आदिवासी समाज की आवाज बुलंद की, जब उनकी समस्याओं और अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा था। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक अस्तित्व और सांस्कृतिक पहचान का प्रश्न बनाया। उनके नेतृत्व में चले आंदोलनों ने झारखंड के लोगों में आत्मविश्वास जगाया और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

उन्होंने कहा कि गुरुजी ने अपना पूरा जीवन शोषण, अन्याय और विस्थापन के खिलाफ संघर्ष करते हुए बिताया। आदिवासी समुदाय, किसानों और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

राष्ट्रपति भवन का क्षण झारखंड के लिए भावुक और गौरवपूर्ण

झामुमो महासचिव ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में गुरुजी की धर्मपत्नी रूपी सोरेन द्वारा पद्मभूषण सम्मान ग्रहण किया जाना पूरे झारखंड के लिए अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण क्षण था। इस अवसर ने राज्य के उन लाखों लोगों की स्मृतियों को ताजा कर दिया, जिन्होंने झारखंड आंदोलन को सफल बनाने में अपना योगदान दिया था।

उन्होंने कहा कि यह सम्मान उस विचारधारा की भी स्वीकृति है, जिसने सामाजिक न्याय, समान अवसर और क्षेत्रीय पहचान के प्रश्नों को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया।

भारत रत्न के वास्तविक हकदार हैं दिशोम गुरु : झामुमो

विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि पद्मभूषण सम्मान निश्चित रूप से राष्ट्र की ओर से गुरुजी के ऐतिहासिक योगदान की स्वीकृति है, लेकिन उनका व्यक्तित्व और कृतित्व इससे भी कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य निर्माण, आदिवासी समाज के उत्थान, सामाजिक न्याय की स्थापना तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में उनके योगदान को देखते हुए वे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ के वास्तविक हकदार हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के राष्ट्र निर्माण, जनकल्याण और सामाजिक परिवर्तन में दिए गए अप्रतिम योगदान का सम्मान करते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करने पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए।

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं गुरुजी

झामुमो महासचिव ने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की अद्वितीय मिसाल है। उन्होंने न केवल झारखंड आंदोलन को दिशा दी, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और न्याय पहुंचाने की सोच को भी मजबूत किया। उनके विचार, सिद्धांत और संघर्ष की विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु का नाम झारखंड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है और पद्मभूषण सम्मान उनके प्रति देश की श्रद्धांजलि के रूप में सदैव याद किया जाएगा।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्मभूषण : झारखंड के संघर्ष, अस्मिता और स्वाभिमान को मिला राष्ट्रीय सम्मान दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्मभूषण : झारखंड के संघर्ष, अस्मिता और स्वाभिमान को मिला राष्ट्रीय सम्मान Reviewed by PSA Live News on 8:57:00 pm Rating: 5

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