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आरक्षण ‘हक’ नहीं, जरूरत के आधार पर हो समीक्षा : अशोक कुमार झा

सर्वजन विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा—आरक्षण की सुविधा का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे, राजनीतिक परिवारों और संपन्न वर्ग के लिए नहीं


रांची।
सर्वजन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसके व्यापक पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की मूल भावना सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से वंचित वर्गों को आगे लाकर समान अवसर उपलब्ध कराना है, इसलिए इस व्यवस्था पर समय-समय पर गंभीर समीक्षा आवश्यक है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक विमर्श में आरक्षण को केवल ‘हक’ के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय यह विचार किया जाना चाहिए कि इसका लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं, जिन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उनका विरोध किसी जाति या समुदाय से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था से है जिसमें जरूरतमंद व्यक्ति पीछे छूट जाए और अपेक्षाकृत संपन्न परिवार लगातार लाभ प्राप्त करते रहें।

उन्होंने कहा कि संविधान का उद्देश्य समाज में समानता और अवसर सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार, आरक्षण को सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के एक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी राजनीतिक या सामाजिक अधिकार के रूप में।

संपन्न परिवारों को लगातार लाभ मिलने पर उठाए सवाल

झा ने अपने बयान में आरक्षित वर्गों से आने वाले कुछ प्रमुख राजनीतिक परिवारों और नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जब किसी परिवार की आर्थिक एवं राजनीतिक स्थिति मजबूत हो चुकी है, तब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आरक्षण का वास्तविक लाभ सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक क्यों नहीं पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा की आरक्षित सीटों पर भी राजनीतिक दलों को ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने पर विचार करना चाहिए जो संबंधित समुदाय के साथ-साथ वास्तव में वंचित और जरूरतमंद पृष्ठभूमि से आते हों।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि आरक्षण व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप की समीक्षा को लेकर है।

‘प्रतिभा और सामाजिक न्याय में संतुलन जरूरी’

आईएएस, आईपीएस, न्यायपालिका, चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए अशोक कुमार झा ने कहा कि देश को सामाजिक न्याय के साथ-साथ प्रतिभा और दक्षता को भी महत्व देना होगा। उन्होंने चिंता जताई कि ऐसी कोई भी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे योग्य युवाओं में यह भावना पैदा हो कि उनकी मेहनत और प्रतिभा का उचित मूल्यांकन नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सामाजिक न्याय, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, समान अवसर और प्रतिभा—इन सभी के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। उनके अनुसार, गरीब और प्रतिभावान युवाओं को बेहतर शिक्षा एवं अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकार को व्यापक नीति बनानी चाहिए।

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों पर भी हो गंभीर विचार

सर्वजन विकास पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि गरीबी किसी एक जाति की समस्या नहीं है। सभी समुदायों में गरीब, मजदूर, किसान और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार मौजूद हैं। इसलिए सरकार को ऐसी नीतियों पर विचार करना चाहिए जिससे वास्तविक वंचित व्यक्ति की पहचान हो सके।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकार छीनना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं और सकारात्मक नीतियों का लाभ सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे।

आरक्षण की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय बहस की मांग

अशोक कुमार झा ने कहा कि लगभग आठ दशक के अनुभव के बाद देश में आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव का निष्पक्ष सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक अध्ययन कराया जाना चाहिए। उन्होंने जातीय राजनीति से ऊपर उठकर विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और सभी समुदायों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यवस्था का उद्देश्य समाज को बराबरी पर लाना है तो उसकी सफलता का आकलन भी इसी आधार पर होना चाहिए कि वास्तविक रूप से कितने वंचित परिवार मुख्यधारा में आए।

‘देश किसी एक जाति या वर्ग का नहीं’

झा ने कहा कि “यह देश किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय का नहीं, बल्कि हर नागरिक का है।” उन्होंने सामाजिक विभाजन की राजनीति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को जातीय ध्रुवीकरण के बजाय शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, किसान, मजदूर और गरीबों के मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सर्वजन विकास पार्टी समान अवसर, भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ संघर्ष तथा जरूरतमंदों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को अपना प्रमुख मुद्दा बनाएगी।

अशोक कुमार झा ने आरक्षण के मुद्दे पर देशव्यापी संवाद और संवैधानिक दायरे में समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि “आरक्षण की सुविधा उस व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए जिसे वास्तव में उसकी जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक टकराव के बजाय समानता, सामाजिक न्याय और वास्तविक वंचितों के अधिकार के प्रश्न के रूप में देश के सामने रखेगी।

आरक्षण ‘हक’ नहीं, जरूरत के आधार पर हो समीक्षा : अशोक कुमार झा आरक्षण ‘हक’ नहीं, जरूरत के आधार पर हो समीक्षा : अशोक कुमार झा Reviewed by PSA Live News on 3:19:00 pm Rating: 5

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