नई दिल्ली/रांची। झारखंड आंदोलन के महानायक, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और "दिशोम गुरु" के नाम से विख्यात Shibu Soren को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में उनकी धर्मपत्नी Rupi Soren ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस ऐतिहासिक अवसर ने पूरे झारखंड को गौरवान्वित कर दिया और राज्य के लाखों लोगों की भावनाओं को एक नई पहचान दी।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा का पर्याय रहा है। उन्होंने आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। झारखंड राज्य के गठन के आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
समारोह के दौरान सम्मान ग्रहण करते समय रूपी सोरेन भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल शिबू सोरेन के लिए नहीं, बल्कि पूरे झारखंड, आदिवासी समाज और उन लाखों लोगों के संघर्ष का सम्मान है, जिन्होंने सामाजिक न्याय और अधिकारों की लड़ाई में उनका साथ दिया। उन्होंने केंद्र सरकार और देशवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिशोम गुरु के विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
समारोह में गांडेय की विधायक Kalpana Soren भी उपस्थित रहीं। उन्होंने इस सम्मान को झारखंड के इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि दिशोम गुरु का संघर्ष, नेतृत्व और जनसेवा की भावना सदैव समाज को दिशा देती रहेगी।
राजनीतिक एवं सामाजिक जगत की अनेक हस्तियों ने इस अवसर पर दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिबू सोरेन ने केवल एक राजनीतिक नेता के रूप में नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बनकर कार्य किया। उन्होंने आदिवासी पहचान, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा।
झारखंड के विभिन्न जिलों में इस सम्मान की घोषणा के बाद उत्साह का माहौल देखने को मिला। कई स्थानों पर लोगों ने मिठाइयां बांटीं और इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया। सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने कहा कि यह सम्मान उन मूल्यों और आदर्शों की भी पहचान है, जिनके लिए दिशोम गुरु जीवनभर संघर्षरत रहे।
मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत किया जाना इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र ने शिबू सोरेन के बहुमूल्य योगदान को स्वीकार किया है। यह सम्मान न केवल उनके संघर्षमय जीवन को श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। दिशोम गुरु का नाम झारखंड की पहचान, आदिवासी स्वाभिमान और जनसंघर्ष की विरासत के रूप में सदैव अमर रहेगा।
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9:10:00 pm
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