ब्रह्माकुमारी संस्थान एवं सामाजिक न्याय मंत्रालय के संयुक्त अभियान में शिक्षकों ने दिया जागरूकता का संदेश, राजयोग मेडिटेशन को बताया प्रभावी उपाय
राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के मेडिकल प्रभाग तथा भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में संचालित "नशा मुक्त भारत अभियान" के अंतर्गत "10 करोड़ नशा मुक्त प्रतिज्ञा" महाअभियान का शुभारंभ रविवार को स्थानीय सेवा केंद्र, चौधरी बागान, हरमू रोड, राँची में दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं ब्रह्माकुमारी परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में समाज, विशेषकर युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं आध्यात्मिक संदेश के साथ हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज नशा केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए गंभीर सामाजिक चुनौती बन चुका है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
गोविंदराम कटारुका विद्यालय की प्रधानाचार्या शिप्रा जी ने कहा कि विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से नहीं, बल्कि उत्तम संस्कारों, अनुशासित जीवनशैली और स्वस्थ मानसिकता से भी निर्मित होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नशा युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। नशे की लत व्यक्ति की प्रतिभा, परिवार की खुशियाँ और समाज की ऊर्जा को नष्ट कर देती है। ऐसे में जन-जन तक जागरूकता पहुँचाने का यह अभियान अत्यंत सराहनीय और समय की आवश्यकता है।
जवाहर नवोदय विद्यालय के उपप्रधानाचार्य प्रदीप कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह विडंबना है कि देश अंग्रेजों की गुलामी से तो आजाद हो गया, लेकिन आज का इंसान नशे का गुलाम बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने मानव जीवन को अमूल्य शरीर प्रदान किया है, जिसकी रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। नशा इस अनमोल जीवन को धीरे-धीरे नष्ट करता है और व्यक्ति स्वयं अपने स्वास्थ्य का सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है।
लेडी के.सी. रॉय मेमोरियल स्कूल की शिक्षिका रिंकू मित्रा घोष ने कहा कि नशे की शुरुआत व्यक्ति के जीवन को खोखला करती है, फिर उसका प्रभाव परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की लत शरीर को कमजोर करती है, लेकिन यदि मन मजबूत हो तो व्यक्ति हर प्रकार की लत पर विजय प्राप्त कर सकता है। उन्होंने मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए राजयोग मेडिटेशन को प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि आज समाज में जागरूकता फैलाने की सबसे अधिक आवश्यकता है।
फिरायालाल पब्लिक स्कूल के शिक्षक बबन तिवारी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि मस्तिष्क में डोपामिन की कमी के कारण कई लोग नशे के आदी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन मानसिक संतुलन बनाए रखने, आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने में सहायक है। इससे व्यक्ति अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर नशे की आदत छोड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि नियमित राजयोग अभ्यास करने वाले अधिकांश लोगों में पुनः नशे की इच्छा काफी कम हो जाती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने बताया कि इस राष्ट्रव्यापी अभियान का लक्ष्य देशभर में 10 करोड़ लोगों को नशामुक्ति की प्रतिज्ञा दिलाना है। उन्होंने कहा कि देश के 372 जिलों में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से नशे के दुष्परिणामों के प्रति व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति के भीतर आत्मबल, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करता है, जिससे नशे जैसी बुराइयों से बाहर निकलने में सहायता मिलती है। इसके प्रशिक्षण के लिए हरमू रोड स्थित ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र में नियमित कक्षाओं का आयोजन किया जाता है।
फिरायालाल पब्लिक स्कूल के शिक्षक सचिन जी ने कहा कि राजयोग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक और बौद्धिक रूप से स्वस्थ जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति दृढ़ संकल्प के साथ सकारात्मक जीवनशैली अपनाए तो नशा जैसी बुराइयों से सहज रूप से मुक्ति पाई जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित प्रभावशाली नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया और नशे के खिलाफ समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। इसके साथ ही सभी शिक्षकों एवं अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित कर आगामी जागरूकता कार्यक्रमों, विद्यालयों में नशामुक्ति प्रतिज्ञा अभियान तथा जनसंपर्क गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने "नशा मुक्त भारत" के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने तथा अपने-अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि यदि परिवार, विद्यालय, समाज और आध्यात्मिक संस्थाएँ मिलकर कार्य करें तो नशामुक्त, स्वस्थ और संस्कारित राष्ट्र का निर्माण संभव है।
Reviewed by PSA Live News
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6:54:00 pm
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