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रिम्स जमीन घोटाला: ACB जांच में बड़ा खुलासा, प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद महतो को बताया गया कथित मास्टरमाइंड, फर्जी वंशावली से लेकर करोड़ों की सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री का खुल रहा राज


रांची।
झारखंड की राजधानी रांची में स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान Rajendra Institute of Medical Sciences (RIMS) की जमीन से जुड़े बहुचर्चित घोटाले की जांच में लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट होती जा रही है। ताजा जांच में प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद कुमार महतो को इस पूरे प्रकरण का कथित मास्टरमाइंड और प्रमुख साजिशकर्ता बताया गया है।

ACB के अधिकारियों के अनुसार, जांच में अब तक जो दस्तावेज, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य सामने आए हैं, उनसे यह संकेत मिलता है कि सरकारी अधिग्रहित जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम पर बेचने और उससे आर्थिक लाभ अर्जित करने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा था। इस नेटवर्क में प्रॉपर्टी कारोबारियों, दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों तथा अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सोनमैती देवी के बयान ने खोले कई राज

जांच के दौरान ACB ने सोनमैती देवी का विस्तृत बयान दर्ज किया। उनके बयान को जांच एजेंसी इस मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है। सोनमैती देवी ने बताया कि उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय बुलाया गया था, जहां उनसे विभिन्न दस्तावेजों पर अंगूठे का निशान लगवाया गया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में प्रमोद कुमार महतो की सक्रिय भूमिका थी।

सोनमैती देवी के अनुसार, विवादित जमीन का एक हिस्सा उनके नाम से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसी को दिए गए बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि जमीन से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया के दौरान उन्हें पूरी जानकारी नहीं थी कि आगे इन दस्तावेजों का उपयोग किस प्रकार किया जाएगा। ACB अब यह जांच कर रही है कि क्या उनके नाम का इस्तेमाल सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री को वैध दिखाने के लिए किया गया था।

सरकारी अधिग्रहित जमीन को निजी संपत्ति बताकर बिक्री का आरोप

जांच में सामने आया है कि जिस जमीन को लेकर विवाद है, वह वर्षों पहले सरकारी प्रयोजनों के लिए अधिग्रहित की जा चुकी थी और उसका उपयोग रिम्स परिसर के विस्तार एवं अन्य सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए किया जाना था। इसके बावजूद उस जमीन को निजी स्वामित्व वाली भूमि दर्शाकर खरीद-बिक्री की प्रक्रिया शुरू की गई।

ACB अधिकारियों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल जमीन की अवैध बिक्री का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी संपत्ति पर सुनियोजित कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर का भी गंभीर मामला बन सकता है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे उत्पन्न हुआ।

फर्जी वंशावली और फर्जी हस्ताक्षरों का खेल

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल बताया जा रहा है। जांच में पहले ही यह तथ्य सामने आ चुका है कि जमीन के स्वामित्व को साबित करने के लिए कथित रूप से फर्जी वंशावली तैयार की गई थी। इतना ही नहीं, दस्तावेजों को प्रमाणिक दिखाने के लिए वार्ड पार्षद के फर्जी हस्ताक्षरों का भी इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे, दस्तावेज कहां तैयार किए गए और किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में रही। यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ और आपराधिक षड्यंत्र के दायरे में भी आएगा।

45.72 लाख रुपये की सेल डीड और कब्जा नहीं मिलने का मामला

ACB जांच में यह भी सामने आया है कि पटना निवासी कामिनी रंजन के पक्ष में 17.35 डिसमिल जमीन की बिक्री के लिए 45 लाख 72 हजार रुपये की सेल डीड तैयार की गई थी। दस्तावेजों के अनुसार जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी कर दी गई थी, लेकिन खरीदार को कभी वास्तविक कब्जा नहीं मिला।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यही वह बिंदु है जहां से पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। जमीन खरीदने वाले पक्ष को जब वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली, तब उन्हें पता चला कि जिस भूमि की खरीद के लिए भारी रकम का भुगतान किया गया था, उस पर उनका अधिकार स्थापित नहीं हो सकता।

वर्ष 2020 में दर्ज हुआ था धोखाधड़ी का मामला

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वर्ष 2020 में ही पटना के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रमोद कुमार महतो के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता कामिनी रंजन ने आरोप लगाया था कि जमीन के नाम पर उनसे राशि ली गई, लेकिन बाद में न तो जमीन का कब्जा मिला और न ही उनकी राशि वापस की गई।

शिकायत में यह भी कहा गया कि जब पैसे लौटाने की मांग की गई तो प्रमोद कुमार महतो द्वारा दिया गया चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गया। इस घटना ने पूरे लेन-देन को और अधिक संदिग्ध बना दिया। ACB अब इस पुराने मामले से जुड़े दस्तावेजों को भी अपने जांच रिकॉर्ड का हिस्सा बना रही है।

कई आरोपी जेल में, जांच का दायरा बढ़ा

इस बहुचर्चित मामले में ACB पहले ही एक बिल्डर सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह घोटाला किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं बल्कि एक संगठित समूह द्वारा अंजाम दिया गया हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर अन्य संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, संपत्ति के रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही है।

समन के बावजूद ACB के सामने उपस्थित नहीं हुए प्रमोद महतो

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ACB ने प्रमोद कुमार महतो को पूछताछ के लिए कई बार समन जारी किया है। हालांकि अब तक वह जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए हैं। इससे जांच एजेंसी की शंकाएं और गहरी हो गई हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बार-बार समन के बावजूद जांच में सहयोग नहीं करता है, तो जांच एजेंसी उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय जांच की प्रगति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर लिया जाएगा।

रिम्स की जमीन पर अवैध कारोबार ने खड़े किए गंभीर सवाल

रिम्स जैसी महत्वपूर्ण सरकारी संस्था की जमीन से जुड़े इस मामले ने राज्य में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा, भूमि अभिलेखों की पारदर्शिता और रजिस्ट्री प्रक्रिया की निगरानी को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकारी अधिग्रहित भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचा जा सकता है, तो यह पूरे भूमि प्रबंधन तंत्र के लिए चिंता का विषय है।

राज्य के प्रशासनिक और कानूनी हलकों में भी इस मामले की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि ACB की जांच आगे बढ़ने के साथ कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं तथा इस मामले में नए नाम भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसी इस बहुचर्चित जमीन घोटाले की तह तक पहुंचकर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है।

रिम्स जमीन घोटाला: ACB जांच में बड़ा खुलासा, प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद महतो को बताया गया कथित मास्टरमाइंड, फर्जी वंशावली से लेकर करोड़ों की सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री का खुल रहा राज रिम्स जमीन घोटाला: ACB जांच में बड़ा खुलासा, प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद महतो को बताया गया कथित मास्टरमाइंड, फर्जी वंशावली से लेकर करोड़ों की सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री का खुल रहा राज Reviewed by PSA Live News on 9:08:00 pm Rating: 5

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