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शराब माफिया के आगे बेबस सिस्टम! खुलेआम लूट रहे ठेकेदार, प्रशासन बना मूकदर्शक

चार महीने बाद भी अधिकांश शराब दुकानों पर नहीं लगी रेट सूची, एमआरपी से अधिक कीमत वसूली का आरोप। ग्राहकों से मनमानी, शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं।


शहडोल/विशेष संवाददाता।

मध्य प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होने के बावजूद शराब दुकानों पर नियमों का पालन होता नजर नहीं आ रहा है। शहडोल शहर सहित जिले के कई क्षेत्रों में संचालित कंपोजिट शराब दुकानों पर निर्धारित रेट सूची (प्राइस लिस्ट) आज तक नहीं लगाई गई है। इसका सीधा फायदा उठाकर ठेकेदार ग्राहकों से एमआरपी से अधिक कीमत वसूल रहे हैं। आरोप है कि प्रशासन और आबकारी विभाग की अनदेखी के कारण यह खेल खुलेआम जारी है।

शराब खरीदने पहुंचे उपभोक्ताओं का कहना है कि एक पाव शराब पर 20 से 30 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, जबकि कुछ ब्रांडों पर इससे भी अधिक कीमत ली जा रही है। जब ग्राहक रेट सूची दिखाने या अधिक पैसे लेने का कारण पूछते हैं तो कर्मचारियों का जवाब होता है कि "यही सरकारी रेट है, लेना हो तो लो, नहीं तो कहीं और चले जाओ।"

सबसे गंभीर बात यह है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद दुकानों के बाहर रेट सूची प्रदर्शित नहीं की गई है। इससे ग्राहकों को वास्तविक कीमत की जानकारी नहीं मिल पाती और ठेकेदार मनमानी वसूली करते रहते हैं। कई ग्राहकों ने बताया कि विरोध करने पर कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है।

आबकारी नियमों की खुली अवहेलना

आबकारी नियमों के अनुसार प्रत्येक शराब दुकान पर लाइसेंसधारी का नाम, लाइसेंस नंबर, शराब की दर सूची और शिकायत के लिए संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण तक की कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से नियम केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।

राजस्व बढ़ा, लेकिन उपभोक्ता असुरक्षित

राज्य सरकार को शराब बिक्री से हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। बावजूद इसके उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा नहीं हो पा रही है। शराब दुकानों पर पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

खुलेआम नियमों का उल्लंघन

जानकारों का कहना है कि कई दुकानों के आसपास खुलेआम शराब पी जाती है, जबकि कानून इसके लिए जुर्माना और दंड का प्रावधान करता है। इसके बावजूद कार्रवाई न होना संबंधित विभागों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

जनता ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और उपभोक्ताओं ने जिला प्रशासन एवं आबकारी विभाग से मांग की है कि सभी शराब दुकानों पर तत्काल रेट सूची लगवाई जाए, एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वाले ठेकेदारों के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए तथा दोषी पाए जाने पर उनका लाइसेंस निरस्त किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मनमानी आगे भी जारी रहेगी और आम जनता आर्थिक शोषण का शिकार होती रहेगी।


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