जन-जागरूकता के साथ प्रभावी कानून और उसके सख्ती से क्रियान्वयन की आवश्यकता, आम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं : अखिल भारतीय उपभोक्ता एवं मानवाधिकार संरक्षण परिषद
रांची/नई दिल्ली। देशभर में खाद्य पदार्थों, विशेषकर सरसों के तेल में मिलावट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अखिल भारतीय उपभोक्ता एवं मानवाधिकार संरक्षण परिषद के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार झा ने इसे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय बताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से कठोर एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भोजन में मिलावट केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि यह समाज के स्वास्थ्य पर सीधा हमला और मानवता के विरुद्ध अपराध है।
अशोक कुमार झा ने कहा कि यदि देश की रसोई तक शुद्ध खाद्य पदार्थ नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो यह केवल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है। सरसों का तेल देश के करोड़ों परिवारों की रसोई का अभिन्न हिस्सा है और यदि उसमें मिलावट की जा रही है तो उसका दुष्प्रभाव बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि मिलावटी खाद्य तेलों के लगातार सेवन से हृदय रोग, लीवर, किडनी, कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए इस समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केवल समय-समय पर छापेमारी या औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान के साथ-साथ ऐसा ठोस, प्रभावी और कड़ाई से लागू होने वाला कानून बनाने की आवश्यकता है, जो मिलावट करने वालों के मन में कानून का वास्तविक भय पैदा करे। उनका कहना था कि जब तक कठोर दंड और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक खाद्य मिलावट का यह अवैध कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकेगा।
अशोक कुमार झा ने कहा कि देश में खाद्य सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बनाया जाना चाहिए। सरकार को प्रत्येक जिले में आधुनिक खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ानी चाहिए, नियमित जांच अभियान चलाना चाहिए, दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए तथा बार-बार अपराध करने वालों के लाइसेंस निरस्त करने और उनकी संपत्ति जब्त करने जैसे कठोर प्रावधानों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी जागरूक बनाना होगा ताकि वे केवल प्रमाणित और विश्वसनीय उत्पादों का ही उपयोग करें।
उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और देश विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है। "आज हमें विकसित भारत के साथ-साथ स्वस्थ भारत की दिशा में भी गंभीरतापूर्वक सोचने की आवश्यकता है। यदि देश का नागरिक स्वस्थ नहीं होगा तो विकास की गति भी प्रभावित होगी। एक सशक्त राष्ट्र की नींव स्वस्थ नागरिकों पर ही टिकी होती है। इसलिए खाद्य सुरक्षा को केवल प्रशासनिक विषय न मानकर राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य अभियान के रूप में देखा जाना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि खाद्य मिलावट के खिलाफ सरकार, प्रशासन, खाद्य सुरक्षा एजेंसियों, न्यायपालिका, सामाजिक संगठनों, मीडिया और आम नागरिकों को मिलकर एक व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता है। प्रत्येक नागरिक का यह अधिकार है कि उसे शुद्ध और सुरक्षित भोजन उपलब्ध हो। इस अधिकार की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
अंत में अशोक कुमार झा ने देशवासियों से भी अपील की कि वे केवल विश्वसनीय एवं लाइसेंस प्राप्त ब्रांडों के खाद्य उत्पाद खरीदें, अत्यधिक सस्ते और संदिग्ध उत्पादों से बचें तथा किसी भी प्रकार की मिलावट या संदिग्ध खाद्य सामग्री की जानकारी तत्काल संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को दें। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता, कठोर कानून और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से ही खाद्य मिलावट पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जा सकता है और तभी "विकसित भारत" के साथ "स्वस्थ भारत" का सपना साकार होगा।
Reviewed by PSA Live News
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10:10:00 pm
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