हेमन्त सोरेन का बड़ा वन मिशन: एक महीने में तैयार होगा झारखंड के सभी जंगलों का डिजिटल रिकॉर्ड, इको-टूरिज्म और वन पट्टा पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए कई अहम निर्देश, कहा— उपयोगी पौधारोपण से बढ़ेगी हरियाली के साथ ग्रामीणों की आय
रांची, 20 जुलाई। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के वन संसाधनों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य गठन से अब तक के सभी वन क्षेत्रों का तकनीकी एवं डिजिटल रिकॉर्ड एक माह के भीतर तैयार किया जाए, ताकि एक क्लिक पर पूरे राज्य के जंगलों की वास्तविक स्थिति, सीमाएं, वन क्षेत्र का विस्तार, जैव विविधता, इको-टूरिज्म परियोजनाएं और अन्य बदलावों की जानकारी उपलब्ध हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कहीं वन क्षेत्र बढ़े हैं तो कहीं खनन, विकास परियोजनाओं और अन्य कारणों से परिवर्तन हुए हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक के माध्यम से वन क्षेत्रों का अद्यतन डिजिटल दस्तावेज तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके लिए वन क्षेत्रों के डिजिटल मैप की लेयरिंग सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।
वन संरक्षण के साथ रोजगार और आजीविका पर भी रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि लाखों ग्रामीणों और वनवासियों की आजीविका का आधार भी हैं। इसलिए पौधारोपण केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि स्थानीय इको सिस्टम और आर्थिक उपयोगिता को ध्यान में रखकर किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, अर्जुन, बैर, कटहल, आंवला, चिरौंजी जैसे स्थानीय एवं उपयोगी वृक्षों के बड़े पैमाने पर रोपण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन वृक्षों से ग्रामीणों को फल, वन उपज, तसर एवं लाख उत्पादन जैसे अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अनुपयोगी पौधे लगाने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि वे न तो स्थानीय समुदाय के काम आते हैं और न ही पशुओं के लिए उपयोगी होते हैं।
हेलीकॉप्टर से होगी बीजों की बुआई, हाथी प्रभावित परिवारों को मिलेगा त्वरित मुआवजा
बैठक में मुख्यमंत्री ने वन क्षेत्रों के विकास के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से बीज गिराने की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही जंगली हाथियों के हमलों में मृत व्यक्तियों के आश्रितों तथा फसल एवं मकान क्षति के मामलों में शीघ्र मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने को कहा।
इको-टूरिज्म बनेगा विकास का नया आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में इको-टूरिज्म की असीम संभावनाएं हैं। वन विभाग और पर्यटन विभाग मिलकर समन्वित योजना तैयार करें ताकि राज्य के प्राकृतिक स्थलों का विकास हो, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यटन को नई पहचान मिल सके।
'एक पेड़ लगाओ, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाओ' योजना का होगा व्यापक प्रचार
मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 'एक पेड़ लगाओ, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाओ' योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग पौधारोपण अभियान से जुड़ सकें।
वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र होगा निपटारा
मुख्यमंत्री ने वन पट्टा वितरण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र लाभुकों को बिना अनावश्यक विलंब के वन पट्टा उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन पारदर्शी, समयबद्ध और परिणाम आधारित होना चाहिए।
काजू और बांस की खेती से बढ़ेगा ग्रामीण रोजगार
बैठक में मुख्यमंत्री ने काजू और बांस की व्यावसायिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बड़े भू-भागों की पहचान कर काजू के पौधे लगाए जाएं, जबकि बांस आधारित उद्योगों और हस्तशिल्प को प्रोत्साहित कर स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएं।
उन्होंने शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और हरित वातावरण के लिए छायादार वृक्षों के बड़े पैमाने पर रोपण की भी बात कही।
प्राकृतिक संपदा झारखंड की सबसे बड़ी पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि घने जंगल, वन्यजीव और समृद्ध जैव विविधता झारखंड की पहचान हैं। इनका संरक्षण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने, अवैध कटाई पर सख्ती, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा संयुक्त वन प्रबंधन को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।
जिलों के डीएफओ से किया सीधा संवाद
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दुमका, जामताड़ा और कोडरमा सहित विभिन्न जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने वन पट्टा वितरण, पौधारोपण, काजू एवं बांस की खेती, इको-टूरिज्म और अन्य योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) और जनविश्वास ऐप के प्रभावी संचालन की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने प्रदूषण संबंधी मामलों में तय मानकों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड का विकास केवल आर्थिक गतिविधियों से नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, वन संपदा के वैज्ञानिक प्रबंधन, ग्रामीणों की आजीविका, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय संतुलन के समन्वित प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने अधिकारियों से इन सभी लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
Reviewed by PSA Live News
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8:08:00 pm
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