रांची में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने की कई अहम घोषणाएं, उत्कृष्ट स्वास्थ्यकर्मी हुए सम्मानित
रांची, 11 जुलाई। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर शनिवार को रांची के होटल बीएनआर चाणक्या में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा राज्यस्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान परिवार नियोजन एवं जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चिकित्सकों, सहियाओं, एएनएम, स्वास्थ्यकर्मियों तथा अधिकारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही अंतरा, इम्प्लांट और पीपीएफ से संबंधित जनजागरूकता पोस्टरों का भी अनावरण किया गया।
रांची में एम्स और रिम्स-2 की दिशा में तेज प्रयास
अपने संबोधन में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि वर्तमान में पूरे राज्य के मरीजों का सबसे अधिक दबाव रिम्स पर है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार के समक्ष रांची में एम्स की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि रिम्स-2 की स्थापना का कार्य भी जल्द आगे बढ़ेगा, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य झारखंड के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। इसके लिए स्वास्थ्य ढांचे को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है।
साहिया बहनों के लिए 400 छोटे एम्बुलेंस की मांग
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि साहिया बहनों की समस्याओं से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को अवगत कराया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 400 छोटे एम्बुलेंस उपलब्ध कराने की मांग की गई है, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में भी समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
हर जिले में मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज स्थापित करने की योजना
डॉ. अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में प्रयासरत है। साथ ही निजी निवेशकों को नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है, जिससे प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता बढ़े और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हों।
हर सदर अस्पताल में सी-सेक्शन सेंटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों की व्यवस्था
स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि राज्य के सभी सदर अस्पतालों में सी-सेक्शन (सिजेरियन प्रसव) के लिए विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक सदर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, अलग वार्ड और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारी, चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मिलकर राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।
बढ़ती आबादी को बेहतर सुविधाएं देना सरकार की प्राथमिकता
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि राज्य सरकार परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। उनका कहना था कि बढ़ती जनसंख्या अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आती है, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में दिल्ली में आयोजित निवेशक सम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विजन के अनुरूप चिकित्सा क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं सामने आई हैं।
जनसंख्या चुनौती नहीं, मानव संसाधन का अवसर है : अपर मुख्य सचिव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या को केवल चुनौती के रूप में नहीं बल्कि मानव संसाधन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। यदि युवाओं को बेहतर शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें तो यही आबादी राज्य और देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष फोकस के साथ कार्य कर रहा है। साथ ही शिशु मृत्यु दर, कुपोषण और परिवार नियोजन जैसे विषयों पर और प्रभावी ढंग से काम करने की आवश्यकता है।
दो वर्षों में सीएचसी और सब-सेंटर तक पहुंचेगी सर्जिकल सुविधा
अजय कुमार सिंह ने बताया कि सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और सब-सेंटर स्तर तक सी-सेक्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। प्रत्येक जिले में 100 बेड क्षमता वाले विशेष केंद्र विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सदर अस्पतालों में टेली-रेडियोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग शुरू हो चुका है और स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार से मृत्यु दर में आई कमी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के कारण कई बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण केवल संख्या घटाने का विषय नहीं बल्कि जीवन की गुणवत्ता, आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति से भी जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों ने जनसंख्या नियंत्रण के उपायों पर रखे विचार
रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि तेजी से बढ़ती आबादी का सीधा प्रभाव संसाधनों, आधारभूत संरचना, पर्यावरण और भूजल पर पड़ता है। उन्होंने कम उम्र में विवाह रोकने, परिवार नियोजन अपनाने और युवाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर दिया।
राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. पुष्पा ने विश्व स्तर पर बढ़ती जनसंख्या से उत्पन्न चुनौतियों तथा झारखंड सरकार द्वारा परिवार नियोजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला में उपस्थित चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए तथा जनसंख्या नियंत्रण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा जागरूकता अभियानों को और प्रभावी बनाने के सुझाव दिए।
स्वास्थ्यकर्मियों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान परिवार नियोजन एवं जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सकों, सहियाओं, एएनएम, स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान देकर उनकी सेवाओं की सराहना की गई।
कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न जिलों के सिविल सर्जनों, चिकित्सकों, जनप्रतिनिधियों, मुखियाओं तथा बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनसंख्या स्थिरीकरण, परिवार नियोजन तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना रहा।
Reviewed by PSA Live News
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8:22:00 pm
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