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भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामला: आरोपी नामजद डीएसपी की नई पोस्टिंग पर बवाल, परिवार बोला—‘न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे’


रिपोर्टर: संजय कुमार

विशेष संवाददाता, PSA Live News

आरा/पटना। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलौटी गांव में हुए चर्चित भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मामले में एफआईआर में नामजद और तत्कालीन जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) राजेश कुमार शर्मा को बिहार सरकार द्वारा हाल ही में पटना स्थित मद्यनिषेध विभाग में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर नई जिम्मेदारी दिए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

भरत तिवारी के परिजनों ने इस नियुक्ति को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया है कि जिस अधिकारी का नाम मामले की प्राथमिकी में दर्ज है और जिन्हें घटना के बाद लाइन हाजिर किया गया था, उन्हें दंडात्मक कार्रवाई के बजाय एक महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर दिया गया है। परिवार का कहना है कि यह कदम न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच की भावना के विपरीत है तथा इससे पीड़ित पक्ष का भरोसा कमजोर हुआ है।

परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी की मौत के मामले में अब तक दोषी अधिकारियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि यदि किसी सामान्य नागरिक पर इतने गंभीर आरोप होते तो उसके खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाती, लेकिन पुलिस अधिकारियों के मामले में अलग रवैया अपनाया जा रहा है। परिवार ने इसे “न्याय के साथ भेदभाव” बताते हुए कहा कि राज्य सरकार से उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

परिवार के सदस्यों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे इस मामले को अब न्यायपालिका के समक्ष और मजबूती से उठाएंगे। उनके अनुसार, पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं से भी हस्तक्षेप की मांग की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो वे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

परिजनों का दावा है कि इस संबंध में कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा चुका है और संबंधित दस्तावेजों को संकलित किया जा रहा है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच तथा नामजद अधिकारियों की गिरफ्तारी तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

भूख हड़ताल की चेतावनी

पीड़ित परिवार ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मामले में आरोपित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो पटना में व्यापक जनसमर्थन के साथ भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। परिवार का कहना है कि यह केवल भरत तिवारी के न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि पुलिस जवाबदेही और कानून के शासन की लड़ाई भी है।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

इस बीच विपक्षी दलों ने भी इस तबादले को लेकर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब किसी अधिकारी का नाम गंभीर आरोपों वाले मामले में सामने आया हो, तब तक उसे महत्वपूर्ण पद पर तैनात करने से सरकार की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विपक्ष ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील पदों से दूर रखा जाए।

केंद्रीय स्तर तक पहुंच सकता है मामला

कुछ मीडिया रिपोर्टों तथा पीड़ित परिवार के दावों के अनुसार, केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से मुलाकात कर अपनी आपत्ति और चिंताओं से अवगत करा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मामला राष्ट्रीय स्तर पर उठता है तो इसकी संवेदनशीलता और बढ़ सकती है। ऐसे में राज्य सरकार पर मामले की पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई का दबाव भी बढ़ेगा।

सरकार की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान

मामले के संबंध में राज्य सरकार या पुलिस मुख्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही नई पोस्टिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि तबादले और पदस्थापन नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन इस विशेष मामले में बढ़ते विवाद को देखते हुए सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

न्याय की प्रतीक्षा में परिवार

भरत तिवारी प्रकरण पहले से ही सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। अब नामजद अधिकारी की नई पोस्टिंग ने विवाद को एक नया आयाम दे दिया है। एक ओर परिवार न्याय की मांग को लेकर संघर्ष तेज करने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार और प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

फिलहाल यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस जवाबदेही, प्रशासनिक पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न बनकर उभर रहा है।

भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामला: आरोपी नामजद डीएसपी की नई पोस्टिंग पर बवाल, परिवार बोला—‘न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे’ भरत तिवारी कथित फेक एनकाउंटर मामला: आरोपी नामजद डीएसपी की नई पोस्टिंग पर बवाल, परिवार बोला—‘न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे’ Reviewed by PSA Live News on 6:15:00 pm Rating: 5

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