रांची नगर निगम के खिलाफ वार्ड पार्षदों का बढ़ता आक्रोश, बिना सूचना कार्यालय में ताला लगाने पर मचा बवाल
रांची। राजधानी रांची में नगर निगम के कार्यशैली को लेकर वार्ड पार्षदों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। नगर निगम के रवैये से असंतुष्ट पार्षद अब एकजुट होकर अपने अधिकारों और जनहित के मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं। इस पूरे विवाद की शुरुआत वार्ड संख्या-16 स्थित पार्षद कार्यालय में बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस अथवा संबंधित पार्षद को जानकारी दिए नगर निगम द्वारा ताला लगाए जाने से हुई।
बताया जाता है कि स्थानीय लोगों ने जब पार्षद कार्यालय बंद होने की सूचना संबंधित वार्ड पार्षद को दी, तब वे मौके पर पहुंचे। वहां नगर निगम के अधिकारियों और पार्षद के बीच तीखी बहस हुई। पार्षदों और स्थानीय नागरिकों के विरोध के बाद आखिरकार नगर निगम को कार्यालय का ताला खोलना पड़ा। इस घटना के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
वार्ड पार्षदों का आरोप है कि नगर निगम जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर रहा है। उनका कहना है कि शहर के कई वार्डों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। सड़कों की मरम्मत नहीं हो रही, नालियों का निर्माण अधूरा है, पेयजल की समस्या बरकरार है और नियमित रूप से विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए बैठकें भी आयोजित नहीं की जा रही हैं। ऐसे में जनता की समस्याओं का समाधान करना लगातार कठिन होता जा रहा है।
पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि वार्ड पार्षद जनता द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए संवैधानिक जनप्रतिनिधि हैं। उनके कार्यालय में बिना सूचना ताला लगाना न केवल जनप्रतिनिधियों का अपमान है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के भी विपरीत है। उनका कहना है कि नगर निगम को जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और सम्मान का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
इस दौरान पार्षदों ने यह भी कहा कि "यह उत्तर प्रदेश नहीं, बल्कि झारखंड है। यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के सम्मान के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम का यही रवैया जारी रहा तो सभी वार्ड पार्षद एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
पार्षदों ने नगर निगम के महापौर, प्रशासक और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित करें और विकास कार्यों को प्राथमिकता दें। उनका कहना है कि नगर निगम का दायित्व केवल अतिक्रमण हटाना या तोड़फोड़ करना नहीं है, बल्कि शहर का सुनियोजित विकास करना, मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम करना भी है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने रांची की नगर राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम इस विवाद पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और वार्ड पार्षदों की नाराजगी दूर करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
Reviewed by PSA Live News
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6:17:00 pm
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