प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क पर उठे गंभीर सवाल, ग्रामीणों ने गुणवत्ता जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
नरपतगंज (अररिया), संवाददाता। एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर विकास के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड अंतर्गत भारत-नेपाल सीमा से सटे फुलकाहा बाजार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित सड़क पहली ही हल्की बारिश में जलमग्न हो गई। सड़क पर जगह-जगह पानी भर जाने से राहगीरों, दुकानदारों, स्कूली बच्चों, किसानों तथा स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। सड़क के दोनों किनारों पर जल निकासी के लिए समुचित नाला नहीं बनाया गया, जिसके कारण हल्की बारिश होते ही सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के समय ही कई ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराया था, लेकिन उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया।
सड़क पर जलभराव से आवागमन हुआ मुश्किल
फुलकाहा गांधी चौक से पश्चिम अमरौरी जाने वाली सड़क तथा दुर्गा मंदिर से गांधी चौक तक का मार्ग सबसे अधिक प्रभावित है। सड़क पर कई दिनों तक पानी जमा रहने से दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव के कारण सड़क पर गड्ढे दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि सड़क पर पानी भरने से ग्राहक बाजार आने से कतराने लगे हैं। इसका सीधा असर व्यापार पर पड़ रहा है। कई दुकानों के सामने पानी जमा रहने से ग्राहकों को आने-जाने में परेशानी हो रही है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।
श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों की बढ़ी परेशानी
दुर्गा मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को जलभराव के बीच होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में मंदिर तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाता है। वहीं विद्यालय जाने वाले बच्चों को भी पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। कई अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के समय वृद्ध, महिलाएं और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी होती है। एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं के संचालन में भी कठिनाई आती है।
निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान मानकों का पालन नहीं किया गया। सड़क की ऊंचाई पर्याप्त नहीं रखी गई और जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई। परिणामस्वरूप हर वर्ष बरसात में सड़क पर पानी भर जाता है और सड़क की परत भी तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगती है।
लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ किया गया होता तो पहली ही बारिश में ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की यह हालत सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।
अधिकारियों की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने कभी स्थल निरीक्षण नहीं किया। यदि समय-समय पर निरीक्षण किया जाता और कमियों को दूर कराया जाता तो आज लोगों को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों की केवल कागजी समीक्षा होती है, जबकि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता की निगरानी नहीं होने से ठेकेदार मनमानी करते हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय ग्रामीण बटेश्वर मरिक, वीरेंद्र मरिक, दिनेश मरिक, गणेश मरिक, रामवृक्ष पासवान, गिरानंद पासवान, हसीब अंसारी सहित कई लोगों ने सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य में अनियमितता पाई जाती है तो दोषी अधिकारियों, अभियंताओं और ठेकेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि सड़क के दोनों ओर मजबूत नाला बनाकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए तथा क्षतिग्रस्त सड़क की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण सड़कों का निर्माण केवल सड़क बिछाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ जल निकासी, मिट्टी की मजबूती, उचित ढलान, गुणवत्ता युक्त निर्माण सामग्री तथा नियमित रखरखाव भी आवश्यक है। यदि इन मानकों की अनदेखी की जाती है तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें कुछ ही वर्षों में बदहाल हो जाती हैं।
जनता को कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल स्थानीय लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभाग पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो आगामी बारिश में स्थिति और भी भयावह हो जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर सड़क की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई तथा स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि का सही उपयोग हो सके और आम जनता को बेहतर सड़क सुविधा मिल सके।
Reviewed by PSA Live News
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11:36:00 am
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