झारखंड में सहकारिता क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार: PACS का कम्प्यूटरीकरण, दुग्ध-मत्स्य समितियों का विस्तार और नई सहकारिता नीति पर तेज़ी
रांची, 24 जुलाई। झारखंड सरकार ने राज्य में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शुक्रवार को राज्य सहकारी विकास समिति (State Cooperative Development Committee - SCDC) की चौथी बैठक आयोजित की गई, जिसमें सहकारिता क्षेत्र के विस्तार, आधुनिकीकरण, विविधीकरण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण से जुड़े 15 महत्वपूर्ण एजेंडों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कई अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी सभी योजनाओं और प्रस्तावों का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सहकारी संस्थाओं को योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
PACS के कम्प्यूटरीकरण पर विशेष जोर
बैठक में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। सरकार का उद्देश्य सभी PACS को डिजिटल रूप से सशक्त बनाकर उनकी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और प्रभावी बनाना है। इससे किसानों को ऋण, बीज, उर्वरक और अन्य सेवाएं तेज़ी से उपलब्ध हो सकेंगी।
दुनिया की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना
बैठक में विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अन्न भंडारण योजना के पायलट प्रोजेक्ट के लिए जिलों एवं बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समितियों (MPCS) के चयन पर भी चर्चा हुई। इस योजना के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर आधुनिक भंडारण व्यवस्था विकसित कर किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
हर जिले में दुग्ध और मत्स्य समितियों का गठन
सरकार ने निर्णय लिया कि प्रत्येक जिले और अंचल में प्रतिमाह कम-से-कम दो पंचायत या ग्राम स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं मत्स्य उत्पादक सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा दुग्ध एवं मत्स्य उत्पादन को संगठित रूप से बढ़ावा देना है।
PACS बनेंगे जन सुविधा केंद्र और किसान सेवा केंद्र
बैठक में PACS एवं MPCS को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) तथा प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी सहमति बनी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं, डिजिटल सुविधाएं और कृषि संबंधी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा।
सहकारी बैंकों की भूमिका होगी और मजबूत
बैठक में "सहकार से समृद्धि" अभियान के तहत सहकारी बैंकों द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। साथ ही कम्प्यूटरीकृत 240 MPCS में Deposit Mobilization Scheme प्रारंभ करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया, जिससे सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत हो सकेगी।
नई सहकारिता नीति पर विस्तृत चर्चा
बैठक में प्रस्तावित झारखंड राज्य सहकारिता नीति पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही निबंधक, सहयोग समितियां के कार्यालयों के कम्प्यूटरीकरण की दिशा में भी आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया, ताकि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाई जा सके।
अधिकारियों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
बैठक में सभी एजेंडों की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रत्येक प्रस्ताव पर आवश्यक निर्णय लेते हुए संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए।
बैठक में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव, राज्य सहकारी विकास समिति के सचिव, वित्त विभाग, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, झारखंड राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, धनबाद केंद्रीय सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, नाबार्ड सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यदि इन निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो झारखंड में सहकारिता क्षेत्र को नई गति मिलेगी। इससे किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ 'सहकार से समृद्धि' के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।
Reviewed by PSA Live News
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8:33:00 pm
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