राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बगान, हरमू रोड, राँची में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रध्वज फहराने के साथ उपस्थित लोगों ने देश की स्वतंत्रता और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को स्मरण किया। स्वतंत्रता दिवस की थीम पर आधारित सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में देशभक्ति और आध्यात्मिक चेतना का भाव और गहरा कर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से अग्रसेन सभा के अध्यक्ष मनोज चौधरी, भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी पीपीओ घोष तथा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मनोज चौधरी ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि मनुष्य को अपने भीतर मौजूद विकारों पर विजय प्राप्त करनी होगी। उन्होंने कहा कि बाहरी दुश्मनों को पराजित करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे आंतरिक विकारों पर विजय प्राप्त करना कहीं अधिक कठिन है। जब आत्मा इन विकारों पर विजय प्राप्त कर लेती है, तभी मनुष्य सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव कर सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी पीपीओ घोष ने मानसिक स्वतंत्रता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परमपिता परमात्मा ने मनुष्य को मानसिक गुलामी से मुक्त होने का मार्ग बताया है। इसके लिए आवश्यक है कि व्यक्ति स्वयं को पहचाने और अपने अस्तित्व तथा आत्मसम्मान को महत्व दे। उन्होंने कहा कि ‘स्व को सम्मान देना’ ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता और मानसिक गुलामी से बाहर निकल सकता है।
केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने राष्ट्रध्वज फहराने के बाद स्वतंत्रता के आध्यात्मिक स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने मूल स्वरूप में पवित्र, शांत, शक्तिशाली और स्वराज्य अधिकारी था। लेकिन समय के साथ वह माया और विभिन्न विकृतियों के प्रभाव में आकर अपने वास्तविक स्वरूप को भूल गया।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य पुनः अपने मूल स्वरूप, अपने स्वधर्म और आत्मिक पहचान को समझे तथा शांति, आनंद, प्रेम, दया और करुणा जैसे गुणों को जीवन में धारण करे, तो आंतरिक विकारों की अधीनता समाप्त की जा सकती है। यही सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता की दिशा में कदम होगा। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति आंतरिक रूप से स्वतंत्र होगा, तभी समाज और राष्ट्र भी वास्तविक शांति एवं समृद्धि की ओर आगे बढ़ सकेगा।
ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि सच्ची और सम्पूर्ण स्वतंत्रता वह है, जिसमें मनुष्य किसी भी प्रकार के कष्ट, क्लेश, कठिनाई, दुःख और अशांति से मुक्त हो। आध्यात्मिक दृष्टि से ऐसी पूर्ण स्वतंत्रता को ‘मुक्ति और जीवनमुक्ति’ कहा गया है। मुक्ति का अर्थ देह-बन्धन, भव-बन्धन, कर्म और उसके फल तथा जन्म-मृत्यु के चक्र से निस्तार की अवस्था से है।
उन्होंने स्वतंत्रता दिवस को केवल एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाने के साथ-साथ इसे आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन का अवसर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राष्ट्र को बाहरी पराधीनता से मुक्ति मिली, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर की कमजोरियों और विकारों से स्वतंत्र होने का संकल्प लेना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता दिवस की थीम पर आकर्षक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति दी गई, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा। आयोजन में देशभक्ति, आध्यात्मिक चिंतन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य, विश्व शांति और मानव कल्याण की भावना के साथ हुआ।
Reviewed by PSA Live News
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11:38:00 pm
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