ब्रह्माकुमारी संस्थान में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह, चेतन झाँकियों के बीच हुआ भावपूर्ण अभिनय, नृत्य और रास
राँची। श्रीकृष्ण केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि श्रेष्ठ जीवन, पवित्रता, योग, सत्य और धर्म के आदर्श स्वरूप हैं। उनके जीवन और शिक्षाओं को आत्मसात कर मनुष्य अपने आचार-विचार एवं व्यवहार को शुद्ध बनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। श्रीकृष्ण का आह्वान केवल बाहरी उत्सव से नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता और श्रेष्ठ कर्मों से किया जा सकता है।
ये बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, चौधरी बागान, हरमू रोड, राँची में आयोजित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह के पूर्व सप्ताह के कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व, उनके आध्यात्मिक स्वरूप तथा उनके जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलित करते हुए डॉ. विनय ढाँढनिया, डायबिटीज विशेषज्ञ, राँची ने कहा कि श्रीकृष्ण हमारे मान्य पूर्वज थे। उन्होंने गीता ज्ञान तथा सहज राजयोग के अभ्यास के माध्यम से श्रेष्ठ देवता-पद प्राप्त किया। वे योगीराज थे। यदि हम वास्तव में श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने आचार-विचार और व्यवहार को शुद्ध करना होगा। मन की पवित्रता और श्रेष्ठ कर्म ही सच्चे अर्थों में श्रीकृष्ण के गुणों का आह्वान हैं।
समाजसेवी प्रवीण राजगढ़िया ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म से ही महान थे। निश्चित रूप से उनके पूर्व जन्म में किए गए श्रेष्ठ पुरुषार्थ का परिणाम उनके व्यक्तित्व में दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से निकट भविष्य में भारत में पुनः श्रीकृष्ण जैसे दिव्य गुणों वाली आत्माओं के पदार्पण और भारत के स्वर्णिम स्वरूप में लौटने की कल्पना की जाती है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में श्रेष्ठ संस्कारों और मूल्यों की स्थापना से ही समाज को सुखमय बनाया जा सकता है।
मनोवैज्ञानिक मनोवीर कौर आनन्द ने कहा कि श्रीकृष्ण प्रशासनिक क्षमता से सम्पन्न थे और राज्य सत्ता तथा धर्म सत्ता दोनों के आदर्श स्वरूप माने जाते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि मनुष्य सबसे पहले स्वयं पर शासन करना सीखे। यदि हम अपनी इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर लें तो अपने व्यवहार और व्यक्तित्व से दूसरों के दिल भी जीत सकते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक विजय दूसरों पर शासन करने में नहीं, बल्कि स्वयं की कमजोरियों पर विजय प्राप्त करने में है।
पंडित रमेश शुक्ला ने कहा कि श्रीकृष्ण ने धर्म की स्थापना और सत्य की रक्षा के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए। जन्माष्टमी का पर्व हमें सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि पर्व-त्योहारों की सार्थकता तभी है, जब उनके संदेश को हम अपने दैनिक जीवन में अपनाएं।
अधिवक्ता विशाल तिवारी ने कहा कि मनुष्य को अपने अंतर्मन के नेत्र खोलकर यथार्थ को अनुभव करने की आवश्यकता है। श्रीकृष्ण केवल शारीरिक रूप से देवता नहीं थे, बल्कि उनके भीतर देवत्व विद्यमान था। ऐसी पवित्र आत्मा का स्मरण भी मनुष्य के भीतर की विकारी भावनाओं को समाप्त करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सहायक हो सकता है।
राजकुमार शर्मा ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि उनके गुणों, शिक्षाओं और आदर्शों को आत्मसात करने का पर्व है। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने आचरण में प्रेम, करुणा, सत्य, पवित्रता और नैतिकता को स्थान देना चाहिए। इससे व्यक्ति का जीवन दिव्य और समाज अधिक बेहतर बन सकता है।
कार्यक्रम की केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला ने श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में नहीं, बल्कि सतयुगी सुखमय दुनिया में हुआ था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय कलियुगी सृष्टि के अंतिम चरण का समय है, जिसके बाद पतित सृष्टि का अंत होकर सुखमय स्वर्ग की स्थापना होती है। वर्तमान समय में जो आत्माएँ गीताज्ञान और राजयोग के माध्यम से विकारों का त्याग कर पवित्र एवं योगी जीवन अपनाएंगी, वही स्वर्ग की दुनिया में श्रीकृष्ण के साथ पदार्पण करेंगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया भ्रष्टाचार, पापाचार, हिंसा और आतंक जैसी समस्याओं के बढ़ते बोझ से जूझ रही है। मानवता को इस संकट से मुक्त कराने के लिए परमात्मा शिव द्वारा मानव आत्माओं को सच्चे ज्ञान और राजयोग का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे आत्मिक शक्ति को पहचानें और अपने जीवन में पवित्रता, शांति एवं सद्गुणों को धारण करें।
समारोह के दौरान श्रीकृष्ण-राधे की चेतन झाँकियों ने सभी का मन मोह लिया। कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय, नृत्य और रास की प्रस्तुति देकर श्रीकृष्ण की लीलाओं एवं उनके दिव्य स्वरूप को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम स्थल पर आध्यात्मिक एवं उत्सवपूर्ण वातावरण बना रहा।
समारोह के अंत में सभी ने एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की बधाई दी। केक कटिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया तथा उपस्थित लोगों के बीच भोग का वितरण किया गया।
चौधरी बागान, हरमू रोड स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान में आयोजित इस समारोह में पूरे समय हर्ष, उमंग और उत्साह का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम में डॉ. रोहित झा, कैंसर विशेषज्ञ, डॉ. शालिनी, ईएनटी विशेषज्ञ सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, चिकित्सक, अधिवक्ता एवं ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
Reviewed by PSA Live News
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7:40:00 pm
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