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जातिगत आरक्षण पर सर्वजन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने उठाए सवाल

“आरक्षण किसी जाति का स्थायी अधिकार नहीं, जरूरतमंद गरीब का सहारा होना चाहिए”


रांची।
सर्वजन विकास पार्टी के संस्थापक सह राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार झा ने जातिगत आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित लोगों को अवसर उपलब्ध कराना था, लेकिन दशकों बाद भी यह सवाल कायम है कि जिन परिवारों और समुदायों के उत्थान के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई, उनमें वास्तविक रूप से सबसे गरीब और जरूरतमंद लोगों तक उसका लाभ कितना पहुंच पाया है।

अशोक कुमार झा ने कहा कि 1950 से लेकर आज तक यदि किसी वर्ग के उत्थान के लिए लगातार सरकारी योजनाओं और आरक्षण की व्यवस्था लागू है, तो निष्पक्ष सर्वे के माध्यम से यह पता लगाया जाना चाहिए कि उस वर्ग के सबसे गरीब परिवार आज भी गरीबी से बाहर क्यों नहीं निकल पाए। आखिर उनके हिस्से का लाभ उन तक क्यों नहीं पहुंच सका?

उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर जाति के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति, संपत्ति, आय, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्थिति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराना चाहिए। इससे स्पष्ट हो सकेगा कि आरक्षण एवं कल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ किन परिवारों को मिला और कौन-से गरीब परिवार आज भी उससे वंचित हैं।

सर्वजन विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी का सवाल किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है। पार्टी का सवाल उस व्यवस्था से है जिसमें जरूरतमंद व्यक्ति की पहचान उसके आर्थिक एवं सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर करने के बजाय केवल जातिगत पहचान को प्रमुख आधार बनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार की कई पीढ़ियां आरक्षण और सरकारी अवसरों का लाभ लेकर आर्थिक रूप से मजबूत हो चुकी हैं, उनके परिवार के सदस्य उच्च पदों पर पहुंच चुके हैं और उनके पास पर्याप्त संसाधन हैं, तो सरकार को यह विचार करना चाहिए कि क्या उसी परिवार को लगातार आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, जबकि उसी समुदाय का अत्यंत गरीब परिवार अभी भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

अशोक कुमार झा ने कहा, “हम किसी गरीब का अधिकार छीनने के पक्ष में नहीं हैं। हमारा स्पष्ट मत है कि वास्तविक गरीब, वंचित और जरूरतमंद व्यक्ति को उसका अधिकार मिलना चाहिए—चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय से आता हो।”

उन्होंने कहा कि संविधान की मूल भावना न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता पर आधारित है। इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें सामाजिक न्याय के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित हो कि सरकारी अवसर और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में सबसे अधिक जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे।

उन्होंने सरकार से मांग की कि देश में निष्पक्ष सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराया जाए और यह सार्वजनिक किया जाए कि आरक्षण तथा संबंधित सरकारी योजनाओं का लाभ किन वर्गों और परिवारों तक पहुंचा है। इसके आधार पर ऐसी नीति बनाई जाए जिससे लाभ का केंद्रीकरण न हो और वास्तविक गरीब एवं वंचित परिवारों को प्राथमिकता मिले।

अशोक कुमार झा ने कहा कि “आरक्षण को किसी जाति का स्थायी विशेषाधिकार मानने के बजाय सामाजिक न्याय और जरूरतमंदों के उत्थान का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए। हमारा लक्ष्य किसी का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जिसका हक है, उसे उसका हक मिले।”

सर्वजन विकास पार्टी ने कहा कि पार्टी समान अवसर, सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी लाभ पहुंचाने के पक्ष में है तथा इस विषय पर व्यापक राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता है।

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