‘Voter Registration and Voter Registers 2026’ में मतदाता पंजीकरण और निर्वाचक नामावली पर होगा व्यापक मंथन
230 एब्सट्रैक्ट्स में से 80 चयनित, 57 शोध-पत्र तकनीकी सत्रों में होंगे प्रस्तुत; निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभव और अकादमिक शोध आएंगे एक मंच पर
रांची, 1 सितंबर 2026। झारखंड की राजधानी रांची में मतदाता पंजीकरण और निर्वाचक नामावली से जुड़े विषयों पर देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, निर्वाचन अधिकारियों, शोधकर्ताओं एवं नीति-विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समागम होने जा रहा है। 02 एवं 03 सितंबर 2026 को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Voter Registration and Voter Registers 2026” का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन का उद्घाटन सत्र 02 सितंबर को पूर्वाह्न 10:00 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित होगा।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड श्री के. रवि कुमार ने मंगलवार को निर्वाचन सदन, धुर्वा, रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में सम्मेलन की तैयारियों एवं उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल अकादमिक चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों और शोधपरक अध्ययन को एक साझा मंच प्रदान करेगा। विभिन्न लोकतांत्रिक देशों में अपनाई जा रही मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची प्रबंधन की व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण होगा।
झारखंड को मिला था शोध का दायित्व
श्री के. रवि कुमार ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार द्वारा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (International IDEA) की अध्यक्षता ग्रहण करने के उपरांत भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के क्रम में देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचन कार्यालयों को निर्वाचन व्यवस्था से संबंधित अलग-अलग विषयों पर शोध का दायित्व सौंपा गया था।
इसी क्रम में झारखंड को “Voter Registration and Voter Registers” विषय पर शोध एवं अध्ययन की जिम्मेदारी मिली। इस विषय को व्यापक स्वरूप देते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड ने देश-विदेश के विभिन्न संस्थानों, शोधार्थियों एवं निर्वाचन विषय के शिक्षाविदों से शोध-पत्रों के एब्सट्रैक्ट आमंत्रित किए।
230 एब्सट्रैक्ट्स प्राप्त, 80 का चयन
सम्मेलन के लिए देश-विदेश से कुल 230 एब्सट्रैक्ट्स प्राप्त हुए। नॉलेज पार्टनर्स की टीम द्वारा इनका विस्तृत मूल्यांकन किए जाने के बाद 80 एब्सट्रैक्ट्स का चयन किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों के विषय-विशेषज्ञों से भी शोध-पत्र आमंत्रित किए गए। पूरी चयन प्रक्रिया के उपरांत कुल 57 शोध-पत्रों को अंतिम रूप से चयनित किया गया है। इन शोध-पत्रों को सम्मेलन के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयवार प्रस्तुत किया जाएगा।
इन शोध-पत्रों के माध्यम से मतदाता पंजीकरण की मौजूदा व्यवस्थाओं, निर्वाचक नामावली के निर्माण एवं प्रबंधन, तकनीकी बदलावों, डिजिटाइजेशन, मतदाता समावेशिता, लोकतांत्रिक भागीदारी और निर्वाचन व्यवस्था के सामने उभरती चुनौतियों पर विशेषज्ञ अपने अध्ययन और अनुभव साझा करेंगे।
कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं नॉलेज पार्टनर
सम्मेलन का आयोजन मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड द्वारा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के सहयोग से किया जा रहा है। IIM रांची, NUSRL रांची तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची सम्मेलन के नॉलेज पार्टनर हैं।
सम्मेलन में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल, IIM रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर सहित विभिन्न प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षाविद् एवं विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
विशिष्ट अतिथियों में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव श्री अरविंद आनंद सहित निर्वाचन एवं अकादमिक क्षेत्र के कई विशेषज्ञ शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र के दौरान “Voter Registration and Voter Registers” विषयक पुस्तक तथा सम्मेलन की स्मारिका का भी लोकार्पण किया जाएगा।
शुद्ध और विश्वसनीय मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूत नींव
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक निर्वाचन व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए शुद्ध, समावेशी, अद्यतन और भरोसेमंद मतदाता सूची अत्यंत महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में सही नामों का समावेश, पात्र नागरिकों का पंजीकरण, अपात्र नामों का निष्कासन और समय-समय पर सूची का अद्यतन निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता से सीधे जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी एवं सामाजिक परिवेश में मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया के सामने नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था, कानून, तकनीक, सामाजिक समावेशिता और अकादमिक शोध के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन इसी दिशा में सार्थक विमर्श का अवसर उपलब्ध कराएगा।
डिजिटाइजेशन से लेकर समावेशी मतदान तक होगी चर्चा
दो दिवसीय सम्मेलन के तकनीकी एवं अकादमिक सत्रों में मतदाता पंजीकरण, निर्वाचक नामावली प्रबंधन, डिजिटाइजेशन, मतदाता डेटा प्रबंधन, मतदाताओं की समावेशिता, लोकतांत्रिक भागीदारी तथा निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े उभरते विषयों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन में निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारी, नीति-निर्माता, विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, पत्रकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी सहभागिता करेंगे। विभिन्न देशों और राज्यों के अनुभवों के आधार पर यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को किस प्रकार अधिक सरल, पारदर्शी, समावेशी और विश्वसनीय बनाया जा सकता है।
भविष्य की निर्वाचन व्यवस्था के लिए उपयोगी होंगे सम्मेलन के निष्कर्ष
श्री के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य दुनिया के विभिन्न लोकतांत्रिक देशों में मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन की व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए बेहतर कार्यप्रणालियों की पहचान करना है। देश-विदेश से प्राप्त शोध-पत्रों और विशेषज्ञों के अनुभवों से वर्तमान व्यवस्था की चुनौतियों को समझने के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप निर्वाचन प्रबंधन को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष, सुझाव और शोधपरक विचार भविष्य में मतदाता पंजीकरण तथा निर्वाचक नामावली प्रबंधन की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, समावेशी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
प्रेस वार्ता में ये अधिकारी एवं विशेषज्ञ रहे मौजूद
प्रेस वार्ता के दौरान अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी श्री देव दास दत्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी श्री धीरज कुमार ठाकुर, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड के राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अपर्णा, IIM रांची के लिबरल आर्ट्स विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. चार्वाक पति, NUSRL रांची के विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंदकुमार आर. शिंदे, सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बी.के. सिन्हा तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. आशुतोष कुमार पांडेय सहित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
सम्मेलन के माध्यम से रांची दो दिनों तक मतदाता पंजीकरण और निर्वाचक नामावली जैसे लोकतंत्र के बुनियादी विषय पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श का केंद्र बनेगा।
Reviewed by PSA Live News
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7:59:00 pm
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