ज्ञान का प्रकाश ही सच्ची साक्षरता और समावेशी विकास की पहचान : संजय सर्राफ
रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर कहा कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने, सही निर्णय लेने और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए सक्षम बनाती है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को ने वर्ष 1966 में इस दिवस की घोषणा की थी और 1967 से इसका आयोजन शुरू हुआ। इसकी पृष्ठभूमि 1965 में तेहरान में आयोजित विश्व शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन से जुड़ी है, जहां निरक्षरता उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने पर जोर दिया गया था।
संजय सर्राफ ने कहा कि आधुनिक समय में साक्षरता का अर्थ अक्षर ज्ञान से कहीं व्यापक हो गया है। आज पढ़ने-लिखने के साथ तार्किक सोच, जानकारी का सही उपयोग, डिजिटल माध्यमों की समझ तथा सही और गलत सूचनाओं में अंतर करने की क्षमता भी साक्षरता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में डिजिटल और मीडिया साक्षरता की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि साक्षरता सामाजिक और आर्थिक बदलाव का मजबूत माध्यम है। शिक्षा व्यक्ति में आत्मविश्वास पैदा करती है और उसे अंधविश्वास, भेदभाव तथा शोषण के खिलाफ जागरूक बनाती है। शिक्षित परिवार अपने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के प्रति अधिक सजग होता है, जिससे एक व्यक्ति की शिक्षा पूरे परिवार और समाज के विकास का आधार बनती है।
उन्होंने बताया कि भारत में भी स्वतंत्रता के बाद से साक्षरता को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई। वर्ष 1988 में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। आज आवश्यकता है कि शिक्षा की पहुंच समाज के हर वर्ग तक सुनिश्चित हो और आर्थिक स्थिति, लिंग, क्षेत्र अथवा सामाजिक पृष्ठभूमि किसी व्यक्ति की शिक्षा में बाधा न बने।
संजय सर्राफ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक ज्ञान और शिक्षा का प्रकाश पहुंचे। यही सच्ची साक्षरता और समावेशी विकास की पहचान है।
Reviewed by PSA Live News
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8:33:00 pm
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