रिश्वत के मामले में 2018 से था फरार, कोर्ट के दबाव के बाद एसीबी ने बंदोबस्त कार्यालय परिसर से कृष्णा सिंह को दबोचा
हजारीबाग। भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में करीब आठ वर्षों से फरार चल रहे आरोपी कर्मचारी कृष्णा सिंह को हजारीबाग एसीबी की टीम ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ न्यायालय से गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी था। एसीबी की टीम ने गुप्त सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर कार्रवाई करते हुए उसे बंदोबस्त कार्यालय परिसर से गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, कृष्णा सिंह, पिता प्रगना सिंह को वर्ष 2018 में रिश्वत लेने के एक मामले में आरोपी बनाया गया था। मामला सामने आने के बाद से ही वह पुलिस की नजर में फरार बताया जा रहा था। लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं होने के कारण न्यायालय की ओर से उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
पहले संभावित ठिकानों पर हुई छापेमारी, फिर कार्यालय परिसर में दबोचा
एसीबी की टीम ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पहले उसके संभावित ठिकानों पर नजर रखी और कई स्थानों पर दबिश भी दी, लेकिन वह हाथ नहीं आया। इसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर एसीबी को उसके बंदोबस्त कार्यालय परिसर में मौजूद होने की जानकारी मिली। सूचना की पुष्टि के बाद टीम ने वहां छापेमारी कर कृष्णा सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
हजारीबाग एसीबी थाना कांड संख्या 02/18 के तहत यह कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश करने की तैयारी की जा रही है।
आठ साल तक नौकरी कैसे चलती रही?
कृष्णा सिंह की गिरफ्तारी ने भ्रष्टाचार के पुराने मामले के साथ-साथ सरकारी सेवा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोपी वर्ष 2018 से ही फरार था, तो इन आठ वर्षों के दौरान उसकी सरकारी सेवा की स्थिति क्या रही? क्या विभागीय रिकॉर्ड में उसकी अनुपस्थिति दर्ज होती रही? यदि वह नियमित रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित था, तो उसकी नौकरी कैसे सुरक्षित रही?
वहीं, यदि वह कार्यालय में उपस्थित होकर काम करता रहा, तो पुलिस रिकॉर्ड में आठ वर्षों तक उसे फरार कैसे माना जाता रहा? क्या विभागीय अधिकारियों को उसके खिलाफ दर्ज मामले और जारी गिरफ्तारी वारंट की जानकारी थी?
वेतन भुगतान और उपस्थिति की भी हो जांच
इस पूरे मामले में अब केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय उसकी आठ वर्षों की सेवा अवधि के रिकॉर्ड की भी जांच जरूरी मानी जा रही है। उसके उपस्थिति पंजी, वेतन भुगतान, अवकाश रिकॉर्ड, पदस्थापन, विभागीय पत्राचार और पुलिस को उपलब्ध कराई गई जानकारी की जांच से कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
खास तौर पर यह जांच जरूरी है कि फरार रहने की अवधि में क्या कृष्णा सिंह को नियमित वेतन मिलता रहा? यदि वेतन भुगतान हुआ है तो किस आधार पर हुआ और उसकी अनुपस्थिति को विभागीय स्तर पर किस तरह दर्ज किया गया?
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय हो
एसीबी ने लंबे समय से फरार आरोपी को गिरफ्तार कर महत्वपूर्ण कार्रवाई की है, लेकिन अब इस मामले का अगला पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आठ वर्षों तक एक आरोपी कर्मचारी का सरकारी सेवा में बने रहना, उसकी उपस्थिति और वेतन भुगतान जैसे सवालों की निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
यदि जांच में यह सामने आता है कि आरोपी फरार रहने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उपस्थित दिखाया गया या उसे वेतन का भुगतान होता रहा, तो जिम्मेदारी केवल आरोपी की नहीं, बल्कि संबंधित विभागीय स्तर पर भी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल कृष्णा सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुराने भ्रष्टाचार मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। अब जांच का दायरा केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहेगा या 2018 से अब तक के पूरे सेवा रिकॉर्ड की भी पड़ताल होगी, इस पर सबकी नजर है।
Reviewed by PSA Live News
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7:35:00 am
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