शिक्षक दिवस पर विशेष संदेश : शिक्षा के साथ जीवन जीने की कला सिखाते हैं सच्चे शिक्षक : ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन
राँची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र, चौधरी बगान, हरमू रोड, राँची में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस श्रद्धा एवं आध्यात्मिक भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने शिक्षक के महत्व, विद्यार्थी के संस्कार और आध्यात्मिक शिक्षा की भूमिका पर प्रेरक विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने, श्रेष्ठ चरित्र निर्माण करने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने की कला भी सिखाते हैं। एक आदर्श शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और आचरण से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को नई दिशा प्रदान करता है।
ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा कि अच्छा विद्यार्थी धीरे-धीरे अपने शिक्षक के गुणों को आत्मसात कर स्वयं भी उनके समान बनने का प्रयास करता है। विद्यार्थी का शिक्षक के प्रति प्रेम, सम्मान और सीखने की लगन शिक्षक को भी आनंदित करती है। जब विद्यार्थी पूरी निष्ठा से ज्ञान को अपने जीवन में धारण करता है, तब शिक्षक को अपने कर्तव्य की सार्थकता का अनुभव होता है।
उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा के संदर्भ में कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था में परमात्मा को सर्वोच्च शिक्षक, पिता और सतगुरु के रूप में स्मरण किया जाता है। आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने तथा श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देता है। इसका उद्देश्य मनुष्य के भीतर शांति, पवित्रता, संतोष और सकारात्मक सोच का विकास करना है।
उन्होंने कहा कि जीवन स्वयं में एक कला है। सुखी रहना और दूसरों को सुख देना ही सच्ची दैवी जीवनशैली है। इसके लिए केवल बाहरी ज्ञान पर्याप्त नहीं, बल्कि मन की शांति और आत्मिक शक्ति भी आवश्यक है। ब्रह्मचर्य, शांति और संतोष जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाते हुए नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को आंतरिक रूप से मजबूत बनाता है।
उन्होंने कहा कि सहज राजयोग का अभ्यास मन को स्थिर एवं सकारात्मक बनाने में सहायक है। इससे व्यक्ति आत्मिक आनंद का अनुभव करते हुए अपने जीवन में श्रेष्ठ गुणों और संस्कारों का विकास कर सकता है।
शिक्षक दिवस के इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने शिक्षक के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके आदर्शों और जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सच्ची शिक्षा वही है, जो ज्ञान के साथ संस्कार, चरित्र के साथ करुणा और जीवन के साथ मानवता का पाठ पढ़ाए।
Reviewed by PSA Live News
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7:44:00 am
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