07 सितंबर को नित्याराधन, महाआरती, महाभोग प्रसाद और महास्तुति के साथ होगा विशेष व्रतोत्सव
राँची। भाद्रपद कृष्णपक्ष की पावन अजा (जया) एकादशी के अवसर पर राँची के दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में सोमवार, 07 सितंबर को विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं व्रतोत्सव का आयोजन किया जाएगा। मंदिर में इस अवसर पर भगवान ऋषिकेश श्रीवेंकटेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना के साथ नित्याराधन, महाआरती, महाभोग प्रसाद और महास्तुति सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होंगे। वैष्णव एवं स्मार्त परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु इस दिन एकादशी व्रत एवं भगवान की आराधना करेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद कृष्णपक्ष में पड़ने वाली अजा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीहरि का पूजन एवं व्रत करने से मनुष्य के पापों का क्षय होता है तथा जीवन के कष्टों और संताप से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी आस्था के साथ मंदिर में श्रद्धालु भगवान श्रीवेंकटेश्वर के दर्शन-पूजन कर व्रत का संकल्प लेंगे।
राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
अजा एकादशी की महिमा का वर्णन विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता के अनुसार प्राचीन काल में चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र ने भी इस व्रत का पालन किया था। कठिन परिस्थितियों और जीवन में आए अनेक संकटों के बीच उन्होंने श्रद्धा एवं नियमपूर्वक अजा एकादशी का व्रत किया। धार्मिक कथा के अनुसार व्रत के प्रभाव से उन्हें अपनी पत्नी का सान्निध्य और पुत्र का जीवन पुनः प्राप्त हुआ तथा उनके जीवन के दुखों का अंत हुआ।
कथा के अनुसार इसके बाद राजा हरिश्चंद्र ने पुनः अपना राज्य प्राप्त किया और अंततः अपने परिजनों एवं प्रजाजनों के साथ स्वर्गलोक को प्राप्त हुए। इसी कारण अजा एकादशी को संकटों से मुक्ति, पुण्य प्राप्ति और भगवान की कृपा प्राप्त करने वाली एकादशी के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है।
मंदिर में होंगे विशेष आयोजन
श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में अजा एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक वातावरण रहेगा। भगवान की नियमित नित्याराधना के साथ विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, महाभोग एवं प्रसाद वितरण तथा महास्तुति का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु भगवान श्रीवेंकटेश्वर के दर्शन कर एकादशी व्रत का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत, जप और दान-पुण्य करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति एवं पुण्य की प्राप्ति होती है। अजा एकादशी इसी कारण सनातन धार्मिक परंपरा में विशेष श्रद्धा और आस्था का पर्व मानी जाती है।
मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे धार्मिक अनुशासन एवं श्रद्धा के साथ व्रतोत्सव में सहभागी बनें और भगवान श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करें।
Reviewed by PSA Live News
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9:11:00 pm
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