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संघर्ष से सफलता तक: सुमन सलूजा की प्रेरणादायक जीवनगाथा

पिता का साया 12 वर्ष की उम्र में उठा, दिव्यांग बहन और अस्वस्थ मां की जिम्मेदारी संभाली; आज शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा और मतदाता जागरूकता की मिसाल बनीं

हिसार/बरवाला | राजेश सलूजा

शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि अपने आचरण और संघर्ष से समाज को जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। हरियाणा के हिसार जिले के बरवाला की सुमन सलूजा ऐसी ही शिक्षिका हैं, जिनकी जीवन यात्रा संघर्ष, आत्मविश्वास, मेहनत और सफलता की प्रेरक कहानी है। आज वे राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नहर कोठी, बरवाला, जिला हिसार में हिंदी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षण के साथ वे समाजसेवा और साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।


12 वर्ष की उम्र में सिर से उठा पिता का साया

सुमन सलूजा के जीवन में संघर्ष की शुरुआत उस समय हो गई थी, जब वे महज 12 वर्ष की थीं। एक सड़क दुर्घटना में उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की परिस्थितियां बेहद कठिन थीं। उनकी मां अशिक्षित होने के साथ-साथ लकवे से पीड़ित थीं। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी बहन 100 प्रतिशत दिव्यांग थी।

ऐसे कठिन दौर में परिवार की जिम्मेदारी धीरे-धीरे सुमन के कंधों पर आ गई। कम उम्र में ही उन्होंने परिस्थितियों से समझौता करने के बजाय उनका सामना करने का फैसला किया। परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने बचपन से ही छोटे-छोटे कार्य किए और साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।

उन्होंने अपने भाई-बहनों को आगे बढ़ाने में सहयोग किया और स्वयं भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ती रहीं। यही संघर्ष आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी ताकत बना।


शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन

शिक्षिका बनने के बाद भी सुमन सलूजा ने अपने संघर्ष और मेहनत को जारी रखा। उनके विद्यार्थियों का शैक्षणिक प्रदर्शन इसका प्रमाण है। पिछले 15 वर्षों से उनकी कक्षा का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा है, जबकि अन्य वर्षों में भी परिणाम उत्कृष्ट रहा।

हिंदी विषय के साथ उन्होंने संगीत विषय का भी अध्यापन किया और संगीत विषय में भी विद्यार्थियों का परिणाम 100 प्रतिशत रहा। उनका मानना है कि शिक्षा केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।

राजकीय कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी

सुमन सलूजा जिला एवं खंड स्तर पर आयोजित विभिन्न राजकीय कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही हैं। पर्यावरण संरक्षण, मतदाता जागरूकता, एड्स दिवस, NSS, रोल मॉडल, ट्विनिंग कार्यक्रम, मातृत्व दिवस, गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे अनेक कार्यक्रमों में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया।

हिंदी के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय रहे। उनके प्रयासों से DIET मात्रश्याम में विद्यालय ने हिंदी दिवस के अवसर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।

‘श्रेष्ठ महिला कर्मचारी’ सम्मान से सम्मानित

सुमन सलूजा की उत्कृष्ट सेवाओं और उल्लेखनीय कार्यों को शासन स्तर पर भी पहचान मिली। 8 मार्च 2024 को उन्हें महामहिम राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय द्वारा हरियाणा सरकार के ‘श्रेष्ठ महिला कर्मचारी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

इसके अतिरिक्त उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, शिक्षा मंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री, विधायक तथा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी उन्हें विभिन्न अवसरों पर सम्मानित किया जा चुका है।

सुशासन अवार्ड से भी सम्मानित

उनके कार्यों को जिला स्तर पर भी विशेष सम्मान मिला। 25 दिसंबर 2025 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर उन्हें जिला स्तरीय ‘सुशासन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके सक्रिय योगदान और जनहित से जुड़े कार्यों की पहचान है।

शिक्षिका के साथ कवयित्री भी

सुमन सलूजा का व्यक्तित्व केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है। साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता है। उन्होंने ‘हौसलों की उड़ान’ नामक पुस्तक लिखी है, जिसमें मित्रता और दोस्तों से जुड़े विषयों पर आधारित प्रेरणादायक कविताओं का संकलन है।

उनकी साहित्यिक रचनाओं में जीवन के अनुभव, रिश्तों की संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच की झलक दिखाई देती है।

मतदाता जागरूकता बनी जीवन का मिशन

सुमन सलूजा ने लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए भी उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद से वे प्रत्येक लोकसभा और विधानसभा चुनाव में नियमित रूप से मतदान करती आ रही हैं।

लेकिन उनकी भूमिका केवल स्वयं मतदान करने तक सीमित नहीं रही। उन्होंने नुक्कड़ सभाओं और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को मतदान के लिए प्रेरित किया। कई अवसरों पर वे स्वयं स्कूटी से मतदाताओं को मतदान केंद्र तक ले जाकर मतदान में सहयोग करती रही हैं।

मतदाता जागरूकता के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें जिला स्तर पर ‘चुनाव आइकन’ के रूप में चयनित किया गया।

संघर्ष को कमजोरी नहीं, ताकत बनाया

सुमन सलूजा की कहानी इस बात का प्रमाण है कि जीवन की कठिन परिस्थितियां व्यक्ति के रास्ते को रोक सकती हैं, लेकिन उसके हौसले को नहीं रोक सकतीं। जिस उम्र में एक बच्ची को पिता के स्नेह और संरक्षण की आवश्यकता होती है, उसी उम्र में उन्होंने पिता को खो दिया। अस्वस्थ मां, दिव्यांग बहन और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि अपने भाई-बहनों को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

आज वही सुमन सलूजा एक शिक्षिका, समाजसेवी, कवयित्री और मतदाता जागरूकता की प्रेरक बनकर समाज के सामने खड़ी हैं।

शिक्षक दिवस पर ऐसी शिक्षिका को सलाम

सुमन सलूजा की जीवनगाथा उन तमाम विद्यार्थियों, महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देने के बारे में सोचते हैं। उनकी यात्रा बताती है कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में बाधा हो सकती है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और हौसले के सामने कोई परिस्थिति स्थायी नहीं होती।

शिक्षक दिवस पर सुमन सलूजा की कहानी केवल एक शिक्षिका की उपलब्धियों का परिचय नहीं, बल्कि ‘हौसलों की उड़ान’ की ऐसी वास्तविक कहानी है, जिसमें संघर्ष से सफलता तक का हर कदम प्रेरणा देता है।

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