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उर्वरक की कालाबाजारी पर कसेगा शिकंजा, सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ेगी निगरानी

प्रतिष्ठानों के स्टॉक का होगा भौतिक सत्यापन, नमूनों की शत-प्रतिशत जांच के निर्देश


मधुबनी, 11 सितंबर।
जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, पारदर्शी वितरण और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर समाहरणालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय उर्वरक निगरानी समिति की बैठक हुई। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त ने की। इसमें उर्वरक की उपलब्धता, प्रखंडवार आवंटन, निर्धारित मूल्य, भंडारण, गुणवत्ता नियंत्रण और किसानों को संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करने सहित विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की गई।

बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों में उर्वरकों की बिक्री और आवागमन पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। इसके लिए विशेष टीम गठित कर नियमित जांच एवं छापेमारी करने तथा अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया।

डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके के उपयोग पर जोर

बैठक में डीएपी के विकल्प को लेकर चर्चा हुई। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि फसल एवं मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त एनपीके उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है। समिति ने किसानों को डीएपी के साथ अनुशंसित एनपीके के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।

सभी उर्वरक प्रतिष्ठानों के स्टॉक की होगी जांच

उप विकास आयुक्त ने जिले के सभी उर्वरक प्रतिष्ठानों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराने और उपलब्ध खाद का अभिलेखों से मिलान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

समिति ने जिले की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभाग को पत्र भेजने का भी निर्णय लिया।

नमूनों की शत-प्रतिशत जांच के निर्देश

उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शत-प्रतिशत नमूना संग्रहण कर उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया गया। गुणवत्ता में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित विक्रेता या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

FSAS से पारदर्शी हो रही खाद की बिक्री

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि एग्री-स्टैक परियोजना के तहत Framework for Fertilizer Sale Application System (FSAS) के माध्यम से जिले में उर्वरकों की बिक्री की जा रही है। खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को 7 से 14 सितंबर 2026 तक FSAS से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

समिति ने किसानों से अपील की कि वे फसल एवं मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें और उपयोग करें। अनावश्यक रूप से अतिरिक्त खाद की खरीद या QR कोड सृजित नहीं करने की सलाह दी गई, ताकि जिले में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

उर्वरक की कालाबाजारी पर कसेगा शिकंजा, सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ेगी निगरानी उर्वरक की कालाबाजारी पर कसेगा शिकंजा, सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ेगी निगरानी Reviewed by PSA Live News on 8:21:00 am Rating: 5

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