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घर में काम करने वाली पत्नियों की कीमत कामकाजी पतियों से कम नहीं - सुप्रीम कोर्ट

सम्पादक - अशोक कुमार झा । 

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि घर में काम करने वाली पत्नियों की तुलना कामकाजी पतियों से किसी भी मायने में कम नहीं है। कोर्ट ने कहा कि घर में काम करने वाली महिला पुरुषों की तुलना में ज्यादा और बिना पैसे के करती हैं काम। जस्टिस एनवी रमन्ना और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए एक जोड़े के रिश्तेदार का मुआवजा बढ़ाने का फैसला दिया। इस जोड़े की मौत दिल्ली में एक हादसे में हो गई थी, जब एक कार ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी थी।उन्होंने कहा कि अगर किसी शख्स के घरेलू कामकाज के लिए लगाए जाने वाले समय की बात करें तो महिलाएं ही इसमे आगे हैं, वह कई तरह की घरेलू कामकाज को करती हैं। महिलाए पूरे परिवार के लिए खाना बनाती हैं, खाने-पीने के सामानों और अन्य घरेलू जरूरतों की चीजों की खरीदारी करती हैं। इसके अलावा घर को साफ रखने से लेकर उसके साज-सज्जा का ख्याल रखती हैं। बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों का ख्याल रखती हैं। घरेलू खर्चे को मैनेज करती हैं और ऐसे ही कई अन्य काम करती हैं। जस्टिस रमन्ना ने कहा कि ग्राणीम इलाकों की महिलाए तो अक्सर खेती के कामों में भी मदद करती हैं। वे खेती की गतिविधियों से लेकर मवेशियों के खान-पान का भी ध्यान रखती हैं।  बेंच ने यह भी कहा कि इससे समाज में एक बड़ा संदेश जाएगा कि कानून और कोर्ट, घर में काम करने वाली महिलाओं (हाउसवाइफ) की मेहनत के मूल्यों, सेवा और त्याग की अहमियत को समझती है।



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