रेलवे स्टेशन रांची पर 13 नाबालिग बच्चों की तस्करी नाकाम — आरपीएफ की सतर्कता से बचाई गई मासूम ज़िंदगियाँ
ट्रेन से गोवा ले जाए जा रहे थे सभी बच्चे, एनजीओ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मिली सफलता
रांची, 14 अक्टूबर 2025 | PSA Live News ब्यूरो रिपोर्ट
रांची रेलवे स्टेशन पर सोमवार रात मानव तस्करी का एक बड़ा मामला उजागर हुआ। रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेल पुलिस (GRP) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 13 नाबालिग बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया।
यह कार्रवाई मंडल सुरक्षा आयुक्त श्री पवन कुमार के निर्देशन में की गई।
सूत्रों के अनुसार, RPF को गुप्त सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 17322 वास्कोडिगामा एक्सप्रेस से कई नाबालिग बच्चों को जसीडीह से गोवा ले जाया जा रहा है, जहां उन्हें मजदूरी और अन्य गैरकानूनी कामों में लगाया जाना था।
गुप्त सूचना पर बनी विशेष टीम, चलती ट्रेन में छानबीन
सूचना मिलते ही RPF पोस्ट रांची, GRP रांची, मुरी थाना पुलिस और एक बाल अधिकार संरक्षण एनजीओ की संयुक्त टीम बनाई गई।
टीम ने मुरी स्टेशन से ट्रेन निकलने के बाद ही चलती ट्रेन में सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
जांच के दौरान कई ऐसे बच्चे पाए गए जो डरे-सहमे थे और उनके साथ कोई अभिभावक नहीं था।
रांची स्टेशन पर रात लगभग 9 बजे ट्रेन के पहुंचते ही टीम ने जनरल कोचों की गहन तलाशी ली और 13 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बरामद किया।
तस्कर हुए फरार, बच्चों को GRP थाना लाया गया
इस अभियान के दौरान कोई भी तस्कर या दलाल पकड़ में नहीं आ सका। बताया जा रहा है कि जांच अभियान की भनक लगते ही वे ट्रेन से उतरकर फरार हो गए।
सभी बच्चों को GRP थाना रांची लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई।
पूछताछ में यह सामने आया कि बच्चे जसीडीह रेलवे स्टेशन से ट्रेन में चढ़ाए गए थे और उन्हें “गोवा में होटल और फैक्ट्री में काम दिलाने” का झांसा दिया गया था।
आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि बच्चों के आधार कार्ड और उम्र संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई, जिससे पुष्टि हुई कि सभी 13 बच्चे नाबालिग हैं।
संवेदनशील कार्रवाई में एनजीओ की भी रही अहम भूमिका
अभियान में शामिल एनजीओ प्रतिनिधियों ने बच्चों को काउंसलिंग दी और अस्थायी तौर पर बाल गृह (शेल्टर होम) में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
बाल कल्याण समिति (CWC) को भी इसकी औपचारिक सूचना दे दी गई है ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सके।
एनजीओ अधिकारियों के अनुसार,
“ये बच्चे बेहद डरे और मानसिक रूप से आहत थे। उन्हें झूठे वादों से बहला-फुसलाकर गोवा भेजा जा रहा था। अगर समय पर कार्रवाई नहीं होती तो ये बच्चे तस्करों के जाल में फंस जाते।”
RPF की सतर्कता से बचाई गई मासूम ज़िंदगियाँ
मंडल सुरक्षा आयुक्त पवन कुमार ने पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि आरपीएफ हमेशा यात्रियों की सुरक्षा और संवेदनशील मामलों के प्रति सजग रहती है।
उन्होंने कहा —
“हमारी प्राथमिकता बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है। रांची मंडल में मानव तस्करी जैसी घटनाओं पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। हर सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।”
झारखंड बना मानव तस्करी का ट्रांजिट रूट
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड के कई ग्रामीण जिलों से बच्चों को रोजगार के बहाने दिल्ली, मुंबई, गोवा और केरल जैसे राज्यों में ले जाया जाता है।
इनमें से कई बच्चे ईंट भट्ठों, होटलों, निर्माण स्थलों या घरेलू कामों में जबरन मजदूरी के लिए लगाए जाते हैं।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से इस पर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स बनाने की मांग की है ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके।
सराहनीय पहल, लेकिन चुनौती बरकरार
इस सफल कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जब सुरक्षा एजेंसियाँ, पुलिस और सामाजिक संगठन एकजुट होकर काम करते हैं, तो बड़ी से बड़ी मानव तस्करी की साजिश नाकाम की जा सकती है।
हालाँकि, अधिकारियों ने माना कि तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए राज्यों के बीच समन्वय और डेटा साझा करना बेहद जरूरी है।
Reviewed by PSA Live News
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8:03:00 pm
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